आखिर कैसे मिलेंगे डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक

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विडम्बना : रादौर क्षेत्र में मेडिकल और नॉन मेडिकल शिक्षा का इंतजाम नहीं कर पा रहा विभाग

  • विद्यार्थियों ने उठाई सइंस स्ट्रीम शुरू करने की मांग

सच कहूँ न्यूज/लाजपतराय
रादौर। देश की उन्नति में विज्ञान यानि साइंस की भूमिका अहम मानी जाती है। वहीं शिक्षा में मेडिकल और नॉन मेडिकल की शिक्षा पाकर ही तो देश को बेहतरीन डॉक्टर और इंजीनियर मिलते हैं। इसके बावजूद जिला यमुनानगर का रादौर क्षेत्र इन सुविधाओं से महरूम है। जहां आज तक भी मेडिकल/नॉन मेडिकल की शिक्षा देने वाला कोई शिक्षण संस्थान नहीं है। इसके चलते इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के इच्छुक होनहार बच्चों को अपनी इच्छाओं का दमन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी समस्या क्षेत्र की लड़कियों के लिए खड़ी हो गई है, जो अपने क्षेत्र से दूर नहीं जा सकती। वहीं परिवारिक परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं होने के चलते कई को तो पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती है। अगर क्षेत्र में मेडिकल/नॉन मेडिकल का शिक्षण संस्थान होगा तो डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छुक लड़कियों के सपने साकार हो सकेंगे।

रादौर की अगर बात करें तो यहां पहले से ही कॉमर्स व आर्ट के शिक्षण संस्थान तो हैं लेकिन मेडिकल/नॉन मेडिकल या अपलाईड सार्इंड के लिए बच्चों को यमुनानगर, कुरुक्षेत्र या करनाल जाना पड़ता हैं, जिसके लिए बच्चों खासकर लड़कियों को काफी जोखिम उठाना पड़ता है, जबकि सरकार द्वारा हाल ही में रादौर गाँव में सरकारी कॉलेज का निर्माण करवाया जा रहा है। जिससे क्षेत्रवासियों में नाराजगी तब और बढ़ गई, जब उन्हें पता चला कि इसमें भी मेडिकल/नॉन मेडिकल या अपलाईड सार्इंस इस बार भी शुरू नहीं हो सकी। जिसके कारण उन्हें अब भी मेडिकल/नॉन मेडिकल या अपलाईड साईस के लिए अन्य शहरों में जाना पड़ेगा।

  • कैसे डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बनेंगी बेटियां

मेडिकल/नॉन मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करके छात्र-छात्राओं को वैज्ञानिक, डाक्टर व इंजीनियर बनने का मौका मिलेगा। जिसमें खास बात है कि आज लड़कियां, लड़कों से किसी भी क्षेत्र में कम नहीं है, लेकिन क्षेत्र में शिक्षण संस्थान न होने के कारण वे दूर न जाने की परिस्थितियों के चलते उन्हें अपनी इच्छाओं का दमन करना पड़ता है। मेरे साथ पढ़ने वाले कई बच्चे थे, जिन्होंने 10+2 तो किसी तरह से सार्इंस से कर ली लेकिन वे आगे की पढ़ाई भी मेडिकल/नॉनमेडिकल में ही करना चाहते थे, लेकिन रादौर में मेडिकल-नॉन मेडिकल का शिक्षण संस्थान न होना उन पर भारी पड़ गया। दूर के शहरों में जाने की उन्हें घर से अनुमति नहीं मिली। उन्होंने अपनी इच्छा का दमन करना पड़ा। वहीं कई लड़कियां हैं, जिन्होंने अपनी स्ट्रीम ही बदलनी पड़ी और कामर्स या आर्ट साइड में अपना कैरियर चुनना पड़ा। लेकिन सार्इंस में आगे की पढ़ाई न कर पाने का मलाल उन्हें जिंदगी भर खलता रहेगा।
काजल सैनी, गाँव धानूपुरा (विद्यार्थी पीएचडी इन बॉटनी, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़)

  • सरकारी कॉलेज खुलने पर भी नहीं थमी परेशानियां

रादौर में कॉलेज खोला जाना अच्छी बात है, लेकिन कॉलेज में मेडिकल/नॉन मेडिकल न होने के कारण क्षेत्र के बच्चों को अन्य शहरों के प्राइवेट कॉलेजों में ही जाना पड़ेगा, जिससे जो परेशानिया हैं वे खत्म नहीं हुर्इं। रादौर में खुलने वाले कॉलेज में सार्इंस विषय आने से समय की बचत के साथ साथ बच्चे भी सुरक्षित होंगे। माता-पिता भी अपने बच्चों को कॉलेज भेजने में संकोच नहीं करेंगे। रादौर में कला संकाय व कॉमर्स के लिए तो बच्चों के पास एमएलएन कॉलेज रादौर में पहले ही मौजूद है, लेकिन सरकारी कॉलेज में सार्इंस स्ट्रीम का होना जरूरी है।
विशाखा जुब्बल

  • मेडिकल/नॉन मेडिकल आज की जरूरत

साइंस स्ट्रीम का अपने आप में ही अलग महत्व है। भले ही किसी कॉलेज में अन्य कितने भी कोर्सिस शुरू हों, जब तक सार्इंस स्ट्रीम शुरू नहीं होगी, तब तक बच्चों को पूरा फायदा नहीं मिलेगा। क्योंकि कला संकाय, कॉमर्स के बच्चे सार्इंस में नहीं जा सकते, जबकि सार्इंस के बच्चे इन दोनों में जा सकते हैं। इसलिए रादौर में बनने वाले सरकारी कालेज में सार्इंस स्ट्रीम आने से ही क्षेत्र के बच्चों को पूरा लाभ मिल सकेगा।
नरेन्द्र कौर, अलाहर एमएससी मैथेमैटिक्स

  • बनना चाहता हूँ कृषि वैज्ञानिक

इसी साल 10+2 नॉन मेडिकल से की है और मैं एग्रीकल्चर से आगे की पढ़ाई करना चाहता हूँ, ताकि कृषि वैज्ञानिक बन सकूं। लेकिन रादौर में एग्रीकल्चर तो क्या बेसिक सार्इंस के लिए भी छात्रों को अन्य शहरों की ओर रूख करना पड़ता है। ऐसे में क्षेत्र के बच्चों के लिए सार्इंस स्ट्रीम का न होना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। जो क्षेत्र के बच्चों पर भारी पड़ रही है।
नमन काम्बोज, राझेड़ी

  • इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के चलते साइंस स्ट्रीम शुरू करना मुश्किल

कॉलेज में इंफ्रास्ट्रक्चर न होने की वजह से सार्इंस स्ट्रीम शुरू करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि अगर जून तक भी उन्हें बिल्डिंग मिल जाती तो वे इस बार ही कोशिश करते। लेकिन बिल्डिंग देरी से तैयार होने के कारण वे इस बार भी इसके लिए प्रयास नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग उन्हें जैसे ही मिलेगी तो वे फिर मेडिकल व नॉन मेडिकल के दाखिलों संबंधी सरकार व विभाग से मांग की जाएगी। क्योंकि सार्इंस स्ट्रीम के लिए लैब्स सहित कई कमरों की जरूरत होती है, जबकि उनके पास स्कूल के मात्र 5 कमरे हैं, जिनमे कला संकाय, कामर्स की कक्षा चल रही हैं।
एसपी गिरोत्रा, उच्चतर जिला शिक्षा अधिकारी एंव प्रिंसिपल सरकारी कॉलेज छछरौली, रादौर व सरस्वती नगर।

 

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