मुकुल दहिया ने 12 घंटे 35 मिनट में 33 किलोमीटर समुद्र को पार कर रचा इतिहास पार

12 डिग्री पानी में 12 घंटे से ज्यादा तैरकर मुकुल दहिया ने किया कमाल

Sarvesh Kumar Picture
Published On

खरखौदा (सच कहूँ/हेमंत कुमार)। Kharkhoda News: थाना कलां गांव के मुकुल दहिया ने  दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में दुनिया की सबसे कठिन ओपन-वॉटर स्विमिंग चुनौतियों में शामिल फॉल्स बे क्रॉसिंग को सफलतापूर्वक पूरा कर नया इतिहास रचा है।

मुकुल दहिया ने मिलर्स प्वाइंट से रुई एल्स तक लगभग 33 किलोमीटर लंबी यात्रा को तैरकर 12 घंटे 35 मिनट में पूरा किया है। इस दौरान उन्होंने समुद्र के 12 से 15 डिग्री  सेल्सियस बर्फीले पानी, अटलांटिक महासागर की ऊंची लहरों और खतरनाक समुद्री धाराओं का सामना किया। फॉल्स बे को दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण ओपन-वॉटर स्विम्स में गिना जाता है। 

मुकुल दहिया पूर्व सरपंच बलराम दहिया के पुत्र हैं और लंबे समय से ओपन-वॉटर स्विमिंग में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यह उपलब्धि उनके करियर की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलताओं में से एक मानी जा रही है।

फॉल्स बे दक्षिण अफ्रीका के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित एक विशाल समुद्री क्षेत्र है, जो केप प्वाइंट  से  केप हैंगक्लिप  तक फैला हुआ है। यह क्षेत्र अपने अप्रत्याशित मौसम, बर्फीले पानी, शक्तिशाली धाराओं और ग्रेट व्हाइट शार्क की मौजूदगी के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। 

तैराकी के दौरान मुकुल को समुद्र में कई दुर्लभ समुद्री जीवों का साथ भी मिला। तैराकी शुरू होने के करीब दो घंटे बाद सफेद डॉल्फ़िन का एक झुंड उनकी सपोर्ट बोट के साथ-साथ तैरता दिखाई दिया। लगभग 45 मिनट तक डॉल्फ़िन मुकुल के आसपास तैरती रहीं, जिससे उन्हें मानसिक ऊर्जा और आत्मविश्वास मिला।

मुकुल ने बताया कि एक पल के लिए वह ठंड और थकान भूल गया। फॉल्स बे में डॉल्फ़िन के साथ तैरना उसके जीवन का सबसे अद्भुत अनुभव था।

इसके बाद केप फर सील्स  भी उनके आसपास दिखाई दीं। पूरी टीम ने इसे जीवन में एक बार दिखने वाला अनुभव बताया। इस उपलब्धि में उनके कोच रोहन मोरे का विशेष योगदान रहा, जिनके मार्गदर्शन में मुकुल ने इस कठिन चुनौती की तैयारी की थी।

मुकुल की इस सफलता पर उनके पिता पूर्व सरपंच बलराम दहिया भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि12 डिग्री तापमान वाले पानी में 12 घंटे से ज्यादा तैरना आसान नहीं होता। उसने हरियाणा की मिट्टी का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी मुकुल की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा है। फॉल्स बे की तैराकी को दुनिया की सबसे कठिन समुद्री तैराकियों में गिना जाता है और इसे पूरा करने वाले तैराकों की संख्या बेहद कम है।

Kharkhoda News (2)

About The Author

Ad Ad

Related Posts