जहरीली शराब का नेटवर्क तोड़ने में सरकार विफल, कमेटी ने अभी तक नहीं बनाई रिपोर्ट

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सरकार की कमेटी में शामिल हैं दो कैबिनेट मंत्री, एक सलाहकार, दो आईएस अधिकारी (Poisonous Liquor)

सच कहूँ/अश्वनी चावला चंडीगढ़। पंजाब की कांग्रेस सरकार में जहरीली शराब का कारोबार थम नहीं रहा। सरकार द्वारा गठित समितियां केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। प्रदेश में जहरीली शराब के नेटवर्क को तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह ने छह जून को एक समिति गठित की थी। समिति को 60 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए थे, लेकिन 180 दिनों के बाद भी उक्त समिति अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं कर पाई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंजाब में अमरेन्द्र सिंह की सरकार नशे के कारोबार के प्रति कितने गंभीर हैं?

 60 दिनों में सौंपनी थी रिपोर्ट, 180 दिन बाद भी नहीं हुई रिपोर्ट

कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने गठित समिति में कैबिनेट मंत्री सुखसरकारिया, मंत्री विजेइन्दर सिंगला, वित्तीय सलाहकार वी.के. गर्ग, सचिव कृष्ण कुमार और पूर्व आई.ए.ऐस. डीएस कल्ला को शामिल किया गया था। उक्त समिति ने केवल तीन बैठकों के अलावा कुछ नहीं किया। इससे स्पष्ट है कि सरकार शराब के कारोबार को रोकने के लिए गंभीर नहीं है। यही वजह है कि गत दिवस राजपुरा में एक फैक्ट्री पकड़ी गई है। अब तक पंजाब में सैकड़ों लोग जहरीली शराब पीने के कारण अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं। इसी वर्ष कोरोना की महामारी दौरान अगस्त के पहले सप्ताह में जहरीली शराब पीने से पंजाब में 110 से ज्यादा लोगों को मौत हो गई थी।

कई दर्जन लोगों को शारीरिक बीमारियों व आंखों की रोशनी तक गंवानी पड़ी है। इस धंधे में लिप्त माफिया को रोकने में सरकार विफल साबित हो रही है। सरकार को खजाने से ज्यादा मोह है, शायद इसीलिए सरकार द्वारा 6 जून 2020 को गठित कमेटी सही तरीके से काम नहीं कर रही। कमेटी को अपनी रिपोर्ट 60 दिनों में तैयार कर पंजाब सरकार को सौंपनी की जिम्मेवारी दी गई थी, लेकिन विडंबना की बात है कि कमेटी 180 बीत जाने के बावजूद भी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप सकी।

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