शिक्षा और रोजगार
विपुल खूनी गैंग के चार शूटरों को ग्रामीण की हत्या में सजा-ए-मौत
12 वर्ष पूर्व कांधला थानाक्षेत्र के गांव भाभीसा में रंजिश के चलते घर में घुसकर दिया गया था हत्याकांड को अंजाम, मृतक के भाई के हाथ में भी लगी थी गोली
कैराना (सच कहूँ/संदीप इन्सां)। 12 वर्ष पूर्व गांव भाभीसा में रंजिश के चलते घर में घुसकर ग्रामीण की गोलियों से भूनकर हत्या करने के चार आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने हत्यारों पर 6.50 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। दोषी करार दिए गए चारों आरोपी कुख्यात विपुल उर्फ खूनी गैंग के शूटर है। विपुल खूनी की पिछले दिनों बागपत में हुई पुलिस मुठभेड़ में मौत हो चुकी है।
एसपी शामली नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि विगत 14 जुलाई 2014 को कांधला क्षेत्र के ग्राम भभीसा निवासी अशोक कुमार अपने घर पर बैठकर अखबार पढ़ रहे थे।
इसी दौरान प्रातः करीब साढ़े नौ बजे सात व्यक्ति कार में सवार होकर वहां आए, जिनके हाथों में राइफल, बंदूक एवं तमंचे थे। आरोपियों ने घर में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें अशोक कुमार के हाथ में गोली लग गई। फायरिंग की आवाज सुनकर अशोक कुमार का छोटा भाई पवन कुमार मौके पर पहुंचा, जिस पर आरोपियों ने गोलियों से भूनकर उसकी हत्या कर दी। पवन कुमार की पत्नी नीलम तथा भाभी सोहनवीरी ने कमरे में छिपकर अपनी जान बचाई। घटना के सम्बन्ध में अशोक कुमार की ओर से थाना कांधला पर भारतीय दंड संहिता की धारा-147, 148, 149, 307, 302, 452 व 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत कराया गया था। बाद में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। विवेचक ने मामले की तफ्तीश करके आरोप-पत्र कोर्ट में दाखिल किया था।
रंजिश के चलते दिया गया हत्याकांड को अंजाम
पुलिस विवेचना में प्रकाश में आया कि घटना के पीछे गहरी रंजिश थी। पवन कुमार के बेटे आशू का नाम कुख्यात बदमाश विपुल उर्फ खूनी की मां ने एक मामले में लिखवाया था, जिसका आशू के द्वारा विरोध किया गया। इसी बात को लेकर आशू एवं विपुल उर्फ खूनी के मध्य रंजिश उत्पन्न हो गई। इसी रंजिश के चलते पवन कुमार की हत्या की घटना को अंजाम दिया गया। विपुल उर्फ खूनी इस आपराधिक गैंग का सरगना था। हत्यारोपी रामवीर, राजीव उर्फ छोटू, राहुल उर्फ बोसी एवं हरेन्द्र उसके साथ शार्प शूटर अथवा सुपारी किलर के रूप में कार्य करते थे। आरोपी विपुल उर्फ खूनी के साथ मिलकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया करते थे।
मजबूत पैरवी के चलते कोर्ट ने सुनाई मृत्युदंड की सजा
उत्तर-प्रदेश शासन द्वारा संचालित 'ऑपरेशन कन्विक्शन' अभियान के तहत शामली पुलिस एवं अभियोजन द्वारा हत्याकांड में मजबूत पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप मुजफ्फरनगर स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश(एफटीसी)संख्या-03 ने पत्रावलियों का अवलोकन करने तथा दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के तर्क-वितर्क सुनने के पश्चात आरोपी रामवीर निवासी पीरखेड़ा कस्बा झिंझाना, राजीव उर्फ छोटू नाई निवासी मोहल्ला रामनगर कस्बा बड़ौत जनपद बागपत, राहुल उर्फ बोसी निवासी ग्राम भभीसा तथा हरेन्द्र निवासी ग्राम कंजरहेड़ी थाना बाबरी को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड व कुल 6.50 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। विदित रहे कि विगत 25 जुलाई 2026 को विपुल उर्फ खूनी को एसटीएफ मेरठ के द्वारा जनपद बागपत में एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया था।
चोरी का वाहन एवं अवैध तमंचा बरामदगी में कारावास की सजा
चोरी का वाहन एवं अवैध हथियार बरामदगी के आरोपी को दोषी पाए जाने पर कोर्ट ने कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एसपी शामली नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वर्ष-2014 में विकास निवासी ग्राम बझेडी के विरुद्ध थाना झिंझाना पर चोरी का वाहन एवं अवैध हथियार बरामदगी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। विचेचक ने मामले की तफ्तीश करके आरोप-पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। शामली पुलिस के द्वारा न्यायालय में प्रभावी एवं सशक्त पैरवी की गई, जिसके परिणामस्वरूप गुरुवार को कोर्ट ने आरोपी विकास को दोनों मामलों में दोषी करार देते हुए जेल में बिताई अवधि के कारावास व कुल चार हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। अर्थदण्ड अदा न करने की स्थिति में कोर्ट ने 05 दिवस के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया है।
