शिक्षकों के सम्मान और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर मंसूरपुर में हुई बैठक, आंदोलन की चेतावनी
मंसूरपुर में शिक्षकों की महापंचायत
मंसूरपुर (सच कहूँ न्यूज़)। Mansoorpur News: शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा तथा परीक्षा प्रणाली में बढ़ती अनियमितताओं को लेकर मंसूरपुर में शिक्षक प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीर चर्चा करते हुए शिक्षकों ने कहा कि अब शिक्षक समाज अपने सम्मान और अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
बैठक में वक्ताओं ने मीडिया और समाज में शिक्षकों के प्रति बढ़ती अपमानजनक टिप्पणियों पर कड़ा विरोध जताया। हाल ही में एक राष्ट्रीय समाचार चैनल की एंकर द्वारा शिक्षकों के लिए प्रयोग किए गए आपत्तिजनक शब्दों की निंदा करते हुए कहा गया कि राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले शिक्षकों का इस प्रकार अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा प्रयागराज में शिक्षकों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार तथा विभिन्न शैक्षणिक मंचों से जुड़े विवादों पर भी चिंता व्यक्त की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि पीड़ित शिक्षकों को न्याय दिलाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष विधिक सहायता प्रकोष्ठ का गठन किया जाएगा।
शिक्षक नेताओं ने लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर भी गहरा रोष व्यक्त किया। उनका कहना था कि इससे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर साझा शिक्षक मोर्चा बनाने का संकल्प लिया। साथ ही सरकार, राज्यपाल और प्रशासन के समक्ष अपनी मांगों को रखने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल गठित करने और चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी।
इस अवसर पर अक्षित सर, आबिद अली, नीरज, राहुल, शशिकांत, जयवीर, संदीप, अश्वनी, दुष्यंत, मनु, नरेश, शान, सैफुद्दीन, शकील, अमरदीप, नरेंद्र, गुरमीत, मोहम्मद इशु, ऋषभ, सुभम कुमार, प्रीतम मिश्रा, विजय तथा बिट्टू सहित अनेक शिक्षक, प्रधानाचार्य, विधिक सलाहकार और शिक्षाविद मौजूद रहे।
बैठक के अंत में शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार के साथ सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन यदि शिक्षकों की सुरक्षा, सम्मान और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित नहीं की गई तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
