आंखें दान कर मानवता को रोशन कर गईं माता सोमवती इन्सां

Sach Kahoon Desk Picture
Published On

बड़ौत, डॉ संदीप कुमार दहिया । सेवा, समर्पण और आस्था से भरा जीवन जीने वाली 75 वर्षीय सोमवती इन्सां पत्नी राजसिंह इंसा का शनिवार रात्रि हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके निधन के बाद परिजनों ने पूज्य संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिँह जी इन्सां द्वारा दी गयी मानवता की सेवा पर चलते है और माता की इच्छा के अनुसार उनकी आंखें दान कर मानवता के प्रति एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सोमवती इन्सां ने वर्ष 1982 में परमपिता शाह सतनाम जी से नामदान लिया था और तभी से वह सेवा कार्यों में सक्रिय रहीं। बरनावा डेरे में उन्होंने खुले मन से सेवा करते हुए अपना जीवन समाज के कल्याण के लिए समर्पित किया। उनका स्वभाव सरल, विनम्र और धार्मिक आस्था से ओत-प्रोत था। जीवन में अनेको कठिन परिस्थितियां आई लेकिन जीवन के अंतिम समय तक उन्होंने सेवा और भलाई का मार्ग नहीं छोड़ा। पूज्य संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिँह जी इन्सां की प्रेरणा से उन्होंने पहले ही आंख दान करने का संकल्प ले रखा था, जिसे उनके परिवार ने पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाया। उनके निधन के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज की टीम मौके पर पहुंची और पूरी प्रक्रिया के साथ उनकी आंखें दान कराई गईं, जिससे जरूरतमंदों को नई रोशनी मिल सकेगी।

सोमवती इंसा अपने पीछे दो बेटे देवेंद्र इन्सां और सेव समिति के सेवादार निटू इन्सां, तथा तीन बेटियां मंजू इन्सां, अनीता इन्सां और सीमा इन्सां सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गईं। परिवार और समाज में उनके जाने से शोक की लहर है, लेकिन उनके द्वारा किए गए सेवा कार्य और अंतिम दान उन्हें हमेशा जीवित रखेंगे।

आस्था और विश्वास की चमत्कारिक मिसाल

कहते हैं जिनका अपने गुरु पर सच्चे हृदय से विश्वास होता है उनका बाल भी बांका नहीं हो पाता। ऐसी ही एक घटना माता के जीवन में घटी। परिजनों के अनुसार वर्ष 2018 में सोमवती इंसा को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ा था। उनका रक्तचाप 350 से ऊपर पहुंच गया था और स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई थी। उसी दौरान उन्हें पूज्य संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां ने उन्हें सपने में दर्शन देते हुए बताया फिक्र करने की जरूरत नहीं है तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होगा। इस अनुभव के बाद उनकी सेहत में अप्रत्याशित सुधार देखने को मिला और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। इस घटना ने उनके मन में गुरु के प्रति विश्वास और भी मजबूत कर दिया। परिवार इसे आस्था और विश्वास की अद्भुत शक्ति मानता है, जिसने उन्हें नया जीवन दिया। सोमवती इन्सां का जीवन यह सिखाता है कि सच्ची सेवा, अटूट विश्वास और मानवता के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ा धर्म है। आंख दान जैसे महान कार्य के माध्यम से उन्होंने मृत्यु के बाद भी समाज को प्रकाश देने का कार्य किया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

About The Author

Related Posts