UP Railway: खुशखबरी, यूपी के इन जिलों को मिली नई रेलवे लाइन, इन गांवों की जमीनों का होगा अधिग्रहण, नए साल का तोहफा

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UP Railway: उतरौला।  बलरामपुर जिले के उतरौला क्षेत्र के लिए नई रेल लाइन परियोजना एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होने जा रही है। आज़ादी के करीब 78 वर्षों बाद पहली बार उतरौला तहसील के लोगों को सीधी रेल सेवा का लाभ मिलने वाला है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की तैयारियां तेज़ कर दी गई हैं और बड़े पैमाने पर ड्रोन सर्वे कराया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उतरौला तहसील के 35 गांवों और सदर तहसील के 33 गांवों सहित कुल 68 गांवों में ड्रोन सर्वे कार्य किया जा रहा है। उतरौला तहसील में सर्वे का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि सदर तहसील में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कुल मिलाकर परियोजना के लिए ड्रोन सर्वे का 70 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है।

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सर्वे और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसानों से भूमि क्रय की जाएगी। इसके उपरांत बजट स्वीकृति मिलते ही विधिवत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। योजना के तहत 40 फीट चौड़ाई में रेल ट्रैक और लगभग 100 मीटर चौड़ाई में स्टेशन परिसर के लिए भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इस परियोजना में उतरौला, श्रीदत्तगंज और कपौवा शेरपुर में नए रेलवे स्टेशन या हॉल्ट के निर्माण का प्रस्ताव है। इसके अलावा सदर ब्लॉक के हसुवाडोल गांव को भी नए हॉल्ट स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। बलरामपुर के भगवतीगंज स्थित रेलवे स्टेशन को इस नई रेल लाइन का केंद्र बनाया जाएगा, जहां से उतरौला के लिए नया ट्रैक बिछाया जाएगा।

परियोजना के अंतर्गत झारखंडी रेलवे स्टेशन को गोंडा-गोरखपुर रेल लाइन से जोड़ते हुए बहराइच-खलीलाबाद रेल लाइन में शामिल किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद जिले के लोगों को बहराइच, खलीलाबाद, गोरखपुर और गोंडा जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों से सीधा रेल संपर्क मिलेगा, जिससे आवागमन, व्यापार और विकास को नई गति मिलेगी।

इस संबंध में जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने रेलवे इंजीनियरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में एडीएम न्यायिक शिव नारायण सिंह सहित रेलवे और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने भूमि अधिग्रहण, ड्रोन सर्वे और स्टेशन निर्माण कार्यों की स्थिति पर चर्चा करते हुए सभी प्रक्रियाओं को तेजी से और समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। यह परियोजना उतरौला और आसपास के क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। हालांकि लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्रोतों पर आधारित है, अतः इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों से स्वयं की जानी चाहिए।

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