Punjab
यशोदा हॉस्पिटल नेहरूनगर डॉक्टर्स की टीम ने सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल युवक की बचाई जान
सर्जरी में वीडियो असिस्टेड थोरेस्कोपिक सर्जरी तकनीकी का उपयोग कर घायल की उपचार किया गया
गाजियाबाद (सच कहूँ/रविन्द्र सिंह)। Ghaziabad News: राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाजियाबाद की सर्जरी टीम ने सड़क दुर्घटना में गंभीर ओपन चेस्ट इंजरी से जूझ रहे युवक की जान बचाई।
गाजियाबाद में अपनी तरह के पहले विशेष मामले में, यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर की जनरल सर्जरी टीम ने अन्य विशेषज्ञ विभागों के सहयोग से मेरठ एक्सप्रेसवे पर हुई एक गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल 31 वर्षीय युवक दिल्ली निवासी गौरव की सफलतापूर्वक जान बचाई।
यह दुर्घटना मेरठ एक्सप्रेसवे पर हुई थी, जिसमें युवक गौरव को बेहद गंभीर चोटें आई थीं। उसके सीने में बड़ा खुला घाव हो गया था, जिससे बायां फेफड़ा और हृदय तक दिखाई दे रहे थे। इसके अलावा कई पसलियां टूट गई थीं और उसकी सांसें भी बहुत धीमी हो गई थीं। यदि समय पर उचित उपचार नहीं मिलता तो स्थिति जानलेवा साबित हो सकती थी।
सड़क दुर्घटना (RTA) के इस मरीज को 24 मई 2026 को सुबह लगभग 7 बजे यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर, गाजियाबाद लाया गया, जहां उसे तुरंत इमरजेंसी विभाग में भर्ती किया गया। जांच में पाया गया कि मरीज के सीने में गहरा खुला घाव था जो छाती की गुहा तक पहुंच गया था। बाईं ओर कई पसलियां टूट गई थीं, कॉलर बोन और छाती की हड्डी को जोड़ने वाला जोड़ (स्टर्नोक्लेविकुलर जॉइंट) अपनी जगह से खिसक गया था, छाती में खून भर गया था (हीमोथोरैक्स) तथा बाएं फेफड़े का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह सिकुड़ गया था। अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण मरीज शॉक की स्थिति में भी था।
मरीज को सबसे पहले आपातकालीन ट्रॉमा उपचार देकर स्थिर किया गया। इसके अंतर्गत घाव की पैकिंग कर रक्तस्राव नियंत्रित किया गया, रक्त चढ़ाया गया तथा छाती से खून और हवा निकालने के लिए चेस्ट ड्रेन डाली गई। चोटों की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न विशेषज्ञताओं के डॉक्टरों की एक टीम गठित की गई।
सर्जरी का नेतृत्व डॉ. प्रसन्ना रमना अरुमुगास्वामी, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एवं मिनिमल एक्सेस सर्जन (MS AIIMS, MCH AIIMS) ने किया। उनके साथ डॉ. अजय पंवार (सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक ट्रॉमा एवं रोबोटिक नी एवं हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी), डॉ. प्रोफ. (कर्नल) मोहम्मद आलम परवाज (डायरेक्टर, प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव एवं कॉस्मेटिक सर्जरी) तथा डॉ. बृजेश प्रजापत (एचओडी, पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसिन) शामिल रहे।
इसके अलावा डॉ. दिलीप कुमार के नेतृत्व में इमरजेंसी टीम, डॉ. कमलदीप यादव एवं डॉ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) प्रवीण कुमार की आईसीयू टीम, डॉ. मुकेश कुमार गर्ग के नेतृत्व वाली एनेस्थीसिया टीम तथा रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. पंकज अग्रवाल ने भी मरीज के सफल उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस जटिल सर्जरी में वीडियो-असिस्टेड थोरेकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) तकनीक का उपयोग किया गया। इसके माध्यम से छाती में जमा खून निकाला गया, खुले घाव की सफाई एवं मरम्मत की गई, खिसके हुए स्टर्नोक्लेविकुलर जॉइंट को सही स्थिति में लाया गया, टूटी हुई पसलियों को स्थिर किया गया, चेस्ट ट्यूब डाली गई तथा घाव का पुनर्निर्माण कर उसे बंद किया गया।
सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया और उसकी लगातार निगरानी की गई। नियमित चेस्ट एक्स-रे में फेफड़े के धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आने की पुष्टि हुई, जिसके बाद मरीज को सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटाया गया। इसके बाद उसकी स्थिति लगातार बेहतर होती गई।
इस गंभीर मामले में विशेष योगदान VATS तकनीक का है, जो एक आधुनिक एवं कम चीरा लगाने वाली सर्जिकल तकनीक है। इसकी मदद से डॉक्टरों ने बिना बड़ी ओपन चेस्ट सर्जरी किए अधिक सटीकता के साथ चोटों का उपचार किया, जिससे मरीज के स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण मदद मिली। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों और लंबे उपचार के बाद मरीज गौरव पूरी तरह स्वस्थ होकर स्थिर स्थिति में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
मामले पर टिप्पणी करते हुए डॉ. प्रसन्ना आर. अरुमुगास्वामी ने कहा कि यह हमारे द्वारा संभाले गए सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रॉमा मामलों में से एक था। मरीज को गंभीर छाती की चोटें, फेफड़े का सिकुड़ना, कई पसलियों का फ्रैक्चर और ऐसा खुला घाव था जिससे महत्वपूर्ण अंग दिखाई दे रहे थे। समय पर उपचार, विभिन्न विशेषज्ञों के समन्वित प्रयास और उन्नत सर्जिकल तकनीकों की मदद से हम उसकी जान बचाने में सफल रहे। VATS जैसी तकनीक जटिल छाती संबंधी सर्जरी में बेहतर परिणाम देने में मदद करती है और ओपन थोरेकोटॉमी से होने वाली जटिलताओं को कम करती है।
यशोदा हॉस्पिटल, नेहरू नगर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. (मेजर) सचिन दुबे ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि किसी भी गंभीर ट्रॉमा मरीज के लिए एक मजबूत और समग्र ट्रॉमा सिस्टम कितना महत्वपूर्ण होता है, जहां इमरजेंसी मेडिसिन, क्रिटिकल केयर, सर्जरी और अन्य विशेषज्ञ विभाग मिलकर समय पर जीवनरक्षक उपचार प्रदान करते हैं।
जटिल ट्रामा मामले का सफल उपचार
इस जटिल ट्रॉमा मामले का सफल उपचार एक बार फिर यशोदा हॉस्पिटल की गंभीर आपातकालीन स्थितियों के प्रबंधन और एक ही छत के नीचे बहु-विषयक एवं समग्र चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की उन्नत क्षमताओं को दर्शाता है।
