Share Market Today: शेयर बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 957 अंक टूटा; निवेशकों के 8.57 लाख करोड़ रुपये डूबे
शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 957 अंक टूटा, निफ्टी 22,300 के पास; निवेशकों के ₹8.57 लाख करोड़ डूबे
मुंबई। Share Market Today: अक्टूबर महीने की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रही। 1 अक्टूबर को कारोबार के दौरान सेंसेक्स में करीब 957 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी 22,300 के आसपास फिसल गया। बाजार में लगातार बिकवाली के बीच निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी आई। आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक, BSE का कुल मार्केट कैप पिछले कारोबारी दिन के ₹4,71,86,380.74 करोड़ से घटकर ₹4,63,28,901.87 करोड़ रह गया। यानी करीब ₹8,57,478.87 करोड़ की बाजार पूंजी कम हुई।
आखिर क्यों गिरा शेयर बाजार?
बाजार में गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। इनमें विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें प्रमुख हैं।
1. FII की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली बाजार पर लगातार दबाव बना रही है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब ₹10,148 करोड़ की बिकवाली की। यह लगातार पांचवां कारोबारी सत्र था, जब विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली जारी रही। सितंबर में विदेशी निवेशकों की भारतीय इक्विटी से निकासी भी काफी ज्यादा रही।Reuters के मुताबिक, सितंबर में विदेशी निवेशकों ने करीब 2.7 अरब डॉलर भारतीय शेयरों से निकाले।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से दबाव
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सावधानी बढ़ी है। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.3% के आसपास पहुंचने की रिपोर्ट है। इससे डॉलर आधारित निवेश अपेक्षाकृत आकर्षक होता है और भारतीय बाजार में विदेशी फंड के प्रवाह पर दबाव पड़ सकता है।
3. रुपये में कमजोरी
भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। 1 अक्टूबर को रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। कमजोर रुपये का असर विदेशी निवेशकों की रिटर्न गणना पर पड़ सकता है और इससे बाजार की धारणा प्रभावित होती है।
4. कच्चे तेल की ऊंची कीमत
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। 1 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड करीब 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए महंगा तेल आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है।
ऑटो शेयरों में भी तेज गिरावट
गुरुवार के कारोबार में कई सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि मेटल और मीडिया समेत अन्य सेक्टर भी दबाव में रहे। बजाज ऑटो समेत कई ऑटो शेयरों में तेज गिरावट देखी गई।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
बाजार में गिरावट के दौरान मार्केट कैप में कमी का मतलब यह है कि शेयरों के बाजार मूल्य में गिरावट आई है। यह जरूरी नहीं कि सभी निवेशकों को वास्तविक नकद नुकसान उसी अनुपात में हुआ हो, क्योंकि नुकसान या फायदा किसी निवेशक के लिए उसके शेयरों की खरीद कीमत और मौजूदा कीमत पर निर्भर करता है।ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के लिए अपने निवेश और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। किसी भी शेयर में निवेश का फैसला केवल एक दिन की बाजार गिरावट के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।