अमेरिका में फाइजर की कोरोना वैक्सीन को मिली मंजूरी

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वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने दवा निमार्ता कंपनी फाइजर द्वारा विकसित की गयी कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन स्थिति में उपयोग को मंजूरी प्रदान कर दी है। दैनिक समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स ने शुक्रवार को प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में सबसे पहले यह वैक्सीन कोरोना के गंभीर लक्षणों वाले मरीजों को दी जायेगी। एफडीए की ओर से फाइजर की कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन स्थिति में उपयोग को मंजूरी देने के इस फैसले को ऐतिहासिक माना जा रहा है।

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) से गंभीर रूप से जूझ रहे अमेरिका में इसके संक्रमण से अब तक 2.94 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका दुनिया में कोरोना से प्रभावित देशों की सूची में पहले स्थान पर है। अमेरिका में यह महामारी विकराल रूप ले चुकी है और अब तक 1.58 करोड़ से अधिक लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केन्द्र (सीएसएसई) की ओर से जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 2,94,874 पहुंच गयी है जबकि संक्रमितों की संख्या 1,58,34,965 हो गयी है।

पूरी तरह सुरक्षित है फाइजर और मॉडर्ना: ट्रम्प

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दवा निमार्ता कंपनी फाइजर और मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीन को सुरक्षित एवं कारगर बताते हुए कहा है कि देश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने फाइजर द्वारा विकसित की गयी कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन स्थिति में उपयोग को मंजूरी प्रदान कर दी है। ट्रम्प ने शुक्रवार देर रात टेलीविजन पर अपने संबोधन में इस बात की जानकारी देते हुए कहा, ‘आज हमारे देश ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक चमत्कार कर दिखाया है। हमने केवल नौ महीनों के भीतर ही एक सुरक्षित एवं कारगर वैक्सीन विकसित कर ली है। इसे इतिहास में सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक उपलब्धियों में गिना जायेगा।

इस वैक्सीन से लाखों लोगों की जिंदगी बचेगी और जल्द ही यह महामारी खत्म हो जायेगी। मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि एफडीए ने फाइजर की कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन स्थिति में उपयोग को मंजूरी प्रदान कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘फाइजर और मॉडर्ना ने घोषणा की है कि उनकी कोरोना वैक्सीन 95 फीसद तक कारगर है जोकि उम्मीद से कहीं अधिक है। ये दोनों ही वैक्सीन काफी सुरक्षित भी मानी जा रही हैं। वैक्सीन के क्लीनिकल परीक्षण में हिस्सा लेने वाले लोगों पर इसके कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े हैं।

 

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