Bullet Train: बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर मंडराया खतरा, जमीन अधिग्रहण विवाद ने बढ़ाई टेंशन
Bullet Train: बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर मंडराया खतरा, जमीन अधिग्रहण विवाद ने बढ़ाई टेंशन
Bullet Train: अहमदाबाद। भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन एक बार फिर नए विवाद में घिर गई है। इस बार मामला जमीन अधिग्रहण के मुआवजे से जुड़ा है। परियोजना प्रबंधन का कहना है कि यदि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन प्राधिकरण (LARRA) द्वारा तय किए गए संशोधित मुआवजे को लागू किया गया, तो परियोजना पर करीब 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है। इससे लगभग 1.10 लाख करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत और समय-सीमा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
गुजरात हाईकोर्ट पहुंचा मामला | Bullet Train
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुलेट ट्रेन परियोजना के मुख्य प्रबंधक ने इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया है। सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि जनवरी और फरवरी में LARRA की ओर से जारी संशोधित मुआवजा आदेशों के कारण परियोजना की लागत में भारी वृद्धि होने की आशंका है। उनका कहना था कि यदि इन आदेशों को लागू किया गया तो परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत और भरूच जिले से जुड़े तीन मामलों में परियोजना प्रबंधन की अपील स्वीकार कर ली है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त तय की है। इस दौरान कोर्ट यह भी विचार करेगा कि LARRA के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई जाए या नहीं। साथ ही अदालत ने परियोजना प्रबंधन से पूछा है कि वह मुआवजे की राशि का कितना हिस्सा जमा कराने के लिए तैयार है।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा मामला भरूच जिले के अमोद तालुका के ओच्छन गांव की जमीन से जुड़ा है। वर्ष 2018 में यहां बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। वर्ष 2020 में अधिग्रहण अधिकारी ने जमीन का मुआवजा 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया था। इसी आधार पर एक भूमि मालिक को लगभग 85.8 लाख रुपये का मुआवजा मिला।
हालांकि, जमीन मालिक ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए मुआवजा बढ़ाने की मांग की। इसके बाद LARRA ने मामले की समीक्षा करते हुए मुआवजा बढ़ाकर 660 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया। इस फैसले के बाद उसी जमीन के लिए मिलने वाला मुआवजा बढ़कर करीब 8.4 करोड़ रुपये हो गया।
परियोजना की लागत पर पड़ सकता है बड़ा असर
बुलेट ट्रेन परियोजना प्रबंधन का कहना है कि यदि इसी प्रकार अन्य मामलों में भी संशोधित मुआवजा लागू किया गया, तो परियोजना की कुल लागत में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त इजाफा हो सकता है। इससे न केवल परियोजना का बजट प्रभावित होगा, बल्कि इसके निर्माण कार्य की गति पर भी असर पड़ने की आशंका है।
अब सभी की नजरें 5 अगस्त को होने वाली गुजरात हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि बढ़े हुए मुआवजे को लेकर आगे क्या रास्ता अपनाया जाएगा और इसका मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर कितना प्रभाव पड़ेगा।