बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार का पर्याय बना एचएयू

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 आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एचएयू से जुडकर उठाएं लाभ: कुलपति

सच कहूँ/संदीप सिंहमार
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार न केवल प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों के बेरोजगार युवक-युवतियों, किसानों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण मुहैया करवा रहा है। यहां से प्रशिक्षण हासिल करने के बाद युवाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में स्वरोजगार स्थापित कर अन्य लोगों को प्रोत्साहित करते हुए रोजगार भी मुहैया करवा रहे हैं। आने वाले समय में अगर युवा अपनी हस्तकला में पारंगत होगा तो वह अपना किसी भी प्रकार का रोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकेगा। ये विचार एचएयू के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज ने हरियाणा दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण एवं शिक्षण संस्थान इस दिशा में अह्म भूमिका निभा रहा है और बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए सायना प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। संस्थान से प्रतिवर्ष सैकड़ों युवक-युवतियां प्रशिक्षण हासिल करते हैं जिनमें से कई अपना स्वरोजगार स्थापित कर बेहतर तरीके से चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में युवाओं के सामने रोजगार की सबसे बड़ी समस्या खड़ी है। ऐसे में अगर युवा कोई प्रशिक्षण हासिल कर स्वरोजगार स्थापित करें तो वे बेहतरीन व्यवसायी बन सकते हैं और अन्य लोगों को भी रोजगार मुहैया करवा सकते हैं।

इस वर्ष आयोजित किए जा चुके हैं 46 प्रशिक्षण

सायना नेहवाल संस्थान की ओर से अभी तक 46 प्रशिक्षण आयोजित कर 2075 प्रशिक्षणार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। मार्च माह तक कुल 77 प्रशिक्षण आयोजित कर 3105 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिए जाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी इसी प्रकार आत्मनिर्भर बनने की दिशा में युवाओं और किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा और नए-नए प्रशिक्षण भी शुरू किए जाएंगे ताकि वे हर क्षेत्र में अपने को स्थापित कर सकें।

स्वावलंबी, समृद्ध और आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए है प्रयासरत

विश्वविद्यालय में ग्रामीण व शहरी महिलाओं, युवाओं व प्रदेश के किसानों को स्वावलम्बी, समृद्ध और आर्थिक रूप से संपन्न बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। इसमें महिलाओं के लिए भी सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण एवं शिक्षण संस्थान द्वारा कराए जाने वाले कोर्स व प्रशिक्षण शामिल हैं। फसल विविधिकरण, कृषि वैज्ञानिकों की सलाह व बेहतर तकनीकों को अपनाकर किसान भी अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। सायना नेहवाल संस्थान में बागवानी, कृषि वानिकी, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन, पशुपालन, मुर्गीपालन, खुम्ब उत्पादन, केंचुआ खाद उत्पादन इत्यादि व्यवसायिक प्रशिक्षण हासिल कर किसान छोटी जोत होते हुए भी अपनी आमदनी में इजाफा कर सकते हैं। उन्नत किस्मों के बीजों के प्रयोग, बीज उपचार, जैविक खाद, समन्वित कीट प्रबंधन, समन्वित खाद प्रबंधन, जैविक खेती एवं रासायनिक उर्वरकों के कम इस्तेमाल से किसान खेती में होने वाले खर्चें को कम करके आर्थिक रूप से ज्यादा समृद्ध हो सकते हैं। कार्यक्रम में ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रामनिवास ढांडा, सह-निदेशक (प्रशिक्षण) डॉ. अशोक गोदारा, मीडिया सलाहकार डॉ. संदीप आर्य सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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