भीड़ हत्या, आतंकवाद, एनसीआर के मुद्दे छाये रहे इस साल

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नयी दिल्ली (एजेंसी)। देश में इस साल गोकशी के नाम पर भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या, जम्मू-कश्मीर(Kashmir) में आतंकवाद के साथ-साथ पत्थरबाजी, महिलाओं के साथ यौन दुर्व्यवहार, असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर, रोहिंग्या समुदाय को वापस भेजने जैसे मुद्दे छाये रहे।

बाहरी सुरक्षा के मोर्चे पर पाकिस्तान से लगती अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में भी पिछले वर्षों की तुलना में इस साल अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई। जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों और सेना की संयुक्त कार्रवाई में इस वर्ष जहां रिकार्ड संख्या में आतंकवादी ढेर किये गये वहीं बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी भी शहीद हुए।

केन्द्र सरकार ने नरम रूख अपनाते हुए जम्मू कश्मीर में रमजान के दौरान सुरक्षा बलों के अभियानों को स्थगित कर दिया। भारतीय जनता पार्टी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का गठबंधन टूटने के बाद जून में राज्य में राज्यपाल शासन लगाया गया था

जो साल के अंत में राष्ट्रपति के शासन में तब्दील हो गया। गोकशी और बच्चों को उठाने के मामलों में सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट के वायरल होने की समस्या को देखते हुए सरकार ने सोशल मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए भी कई कदम उठाये और कुछ नियम बनाये।

जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकायों के चुनाव , पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम का हटाना , पश्चिमी सीमा पर स्मार्ट बाड़ लगाना, आपात स्थिति के लिए देश भर में समान फोन नम्बर 112 लागू करना , द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर पहला भारत-चीन समझौता और राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की स्थापना इस वर्ष सरकार की उपलब्धि रही।

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