Supreme Court News: आवारा कुत्तों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की आई बड़ी अपडेट!
Stray Dogs Case: नई दिल्ली। देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। इन याचिकाओं में 7 नवंबर 2025 को पारित आदेश में संशोधन की मांग की गई है। Supreme Court News
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने मामले में नियुक्त न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) गौरव अग्रवाल की दलीलें सुनीं। उन्होंने पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों का विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से पेश अधिवक्ता को भी सुना। कोर्ट ने पूर्व आदेश में एनएचएआई को राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने तथा सड़कों की घेराबंदी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय का पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) को निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) को निर्देश दिया कि पशु आश्रय गृह अथवा पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित करने की अनुमति मांगने वाले गैर-सरकारी संगठनों के आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। पीठ ने स्पष्ट कहा कि आवेदन या तो स्वीकृत किए जाएं अथवा अस्वीकृत, लेकिन अनावश्यक विलंब न हो। न्यायालय ने सभी पक्षों को निर्देश दिया कि वे इस मामले में अपने लिखित उत्तर शीघ्र दाखिल करें। सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकारों की निष्क्रियता पर चिंता जताते हुए कहा कि नसबंदी क्षमता बढ़ाने के निर्देशों का अपेक्षित पालन नहीं हो रहा है। Supreme Court News
यह मामला 7 नवंबर 2025 के उस आदेश से संबंधित है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाकर नसबंदी एवं टीकाकरण के बाद निर्धारित आश्रय स्थलों में भेजने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि पकड़े गए कुत्तों को उनके मूल स्थान पर पुनः नहीं छोड़ा जाएगा।
इसके अतिरिक्त, अदालत ने राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे से मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने का भी निर्देश दिया था। इससे पूर्व 13 जनवरी को अदालत ने संकेत दिया था कि कुत्ते के काटने की घटनाओं में राज्यों को पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा देने और लापरवाही के मामलों में जवाबदेही तय करने पर विचार करना होगा। यह कार्यवाही उस स्वतः संज्ञान याचिका से जुड़ी है, जिसकी शुरुआत पिछले वर्ष 28 जुलाई को एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। रिपोर्ट में राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज संक्रमण, विशेषकर बच्चों में, बढ़ने की चिंता जताई गई थी। Supreme Court News