आखिर क्यों कहा पिताजी ने, कर्म करे खोटे, पड़ेंगे बड़े सोटे
चंडीगढ़ (एमके शायना)। गुरु हमेशा सृष्टि के भले के लिए अपने पावन वचनों से लोगों को समझाते रहते हैं। कई बार इंसान इतना बिगड़ जाता है कि उसे परमात्मा का खौफ नहीं रहता। पर परमात्मा को सब पता होता है कि इंसान को कब और कैसे ठीक करना है। आज का इंसान बहुत स्वार्थी हो चुका है। इंसान शैतानों वाले काम कर रहा है और उसमें भगवान का डर खत्म होता जा रहा है जिससे वह भगवान को तुच्छ समझता हुआ बुराइयों पर बुराइयां करता चला जा रहा है। संत सभी इंसानों को अपनी औलाद समझते हुए हर तरीके से समझाने की कोशिश करते हैं कभी प्यार से कभी क्रोध से।
संतों के क्रोध में भी इंसान की भलाई ही छिपी होती है। संतों का एक ही उद्देश्य होता है सभी जीवो को भक्ति मार्ग से जोड़ना और उन्हें अंदर बाहर से खुशियां प्रदान करना। एक सत्संग में पूज्य गुरु जी ने बुराइयों में लिपित कलयुगी इंसान की स्थिति और बुरे कर्मों के दुष्प्रभावों के बारे में बयान करते हुए फरमाया कि,”कर्म करे खोटे पड़ेंगे बड़े सोटे, कईयों को सोटों का ही इंतजार है और राम से यही चाहते हैं कि मालिक थोड़ा बहुत चुटका तो दिखा ही दिया कर क्या पता वह उन चुटकों से ही वे ठीक हो जाएं, अगर वैसे नहीं हो रहे तो। सो हम तो राम से दुआ करते हैं कि भला हो जाए, छोटा सा चुटका तो ठीक ही रहता है, बड़े वाला तो फिर, फिर तो मुश्किल हो जाता है।
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कईयों को यह अहंकार है, खुदी है कि हमारा क्या, क्या हो जाएगा, देख लेंगे। तो राम तू तो दया का सागर है ,माना कि दोनों जहान का दाता है, पर दाता आज तेरा आदमी इतना बिगड़ चुका है या बिगड़ैल बन गया है या यूं कहें कि शैतान का बाप, चुड़ैल का बाप बन गया है। तु अगर सुधारना चाहे तेरे लिए तो कोई बड़ी चीज नहीं। सो मालिक की मर्जी वह कैसे किसी को सुधारता है, संत तो दुआ यही करते हैं सबको सुधार , सबको नेकी की राह पर चला”।
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