Diabetes : मधुमेह रोग पर हो ठोस चिकित्सा अनुसंधान

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आजकल सोशल मीडिया पर हर चौथी-पांचवीं पोस्ट मधुमेह (Diabetes) के उपचार की जानकारी से जुड़ी हुई मिलती है। बड़े-बड़े डॉक्टरों से लेकर नीम हकीम तक, दवाइयां और घरेलू नुस्खों का बोलबाला है। नीम हकीम भी खूब चांदी कूट रहे हैं। पोस्ट शेयर करने पर अलग कमाई हैं। वास्तव में करोड़ों पोस्ट की भरमार इस वजह से है कि मधुमेह के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। तस्वीर का दूसरा पहलू नए खुलासे व दावे कर रहा है। कई मेडिकल विशेषज्ञ दावा कर रहे हैं कि 90 फीसदी से अधिक लोगों को मधुमेह नहीं है, वे बिना वजह मधुमेह की दवाई ले रहे हैं। इसी तरह पश्चिमी देशों में मधुमेह संबंधी टेस्टों के मापदंड हमारे देश से अलग हैं।

भारत के लिए यह समस्या इसीलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि यहां की जनसंख्या एक अरब 40 करोड़ से अधिक हो गई है। मरीजों के संख्या ज्यादा होने के चलते दवाई कंपनियां बड़े स्तर पर कारोबार कर रही हैं। मधुमेह (Diabetes) संबंधी गलत जानकारी संवेदनशील मामला है। लोगों के स्वास्थ्य पर खूब पैसा खर्च किया जाता है और बिना बीमारी के दवा लेना स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। यह अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह मधुमेह की वास्तविक्ता क्या है, इसको लेकर ठोस नीतियां और परियोजनाएं शुरू कर वास्तविक्ता को पेश करें।

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