”ईरान में फंसे पायलट के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए अमेरिका ने उतारे 155 एयरक्राफ्ट!” ईरान ने करार दिया ‘ऑपरेशन नाकाम’

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US Pilot Rescue Operation: वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी है कि अमेरिकी वायुसेना ने एक अत्यंत जोखिमपूर्ण सैन्य अभियान चलाकर ईरान के क्षेत्र में फंसे अपने दो वायुसेना कर्मियों को सुरक्षित वापस लाने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने इस अभियान को हाल के वर्षों के सबसे चुनौतीपूर्ण खोज-और-बचाव अभियानों में से एक बताया। US Military News

ईरान ने US पायलट बचाव अभियान का मज़ाक उड़ाया

वहीं ईरान ने अमेरिका के लेगो-स्टाइल वीडियो में US पायलट बचाव अभियान का मज़ाक उड़ाया और अभियान को ‘नाकाम अभियान’ करार दिया है जिस पर अमेरिका ने 600 मिलियन डॉलर बर्बाद कर दिया। इस वीडियो में उसने दावा किया कि यह बचाव अभियान असल में अमेरिका द्वारा इस ऑपरेशन के दौरान यूरेनियम चुराने की एक कोशिश थी। वीडियो के अनुसार, US सेना ने कमांडो और हेलीकॉप्टरों की मदद से रात के अंधेरे में एक गुप्त अभियान के तहत आधी रात को हमारा यूरेनियम चुराने की कोशिश की। कमांडो और ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर बुरी तरह नाकाम रहे, ठीक वैसे ही जैसे तबस में हुआ था।”

डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना उस समय की है जब ईरान के विरुद्ध चल रहे सैन्य अभियान के दौरान एक अमेरिकी एफ-15ई लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान के दोनों चालक दल के सदस्य पैराशूट के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर उतरे थे। इनमें से एक पायलट को कुछ ही समय में खोज लिया गया, जबकि दूसरा अधिकारी लगभग दो दिनों तक लापता रहा।

व्हाइट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि बचाव कार्य के दौरान अमेरिकी सेना को शत्रु क्षेत्र में लगातार तीव्र प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान कई घंटों तक ईरान के ऊपर निरंतर उड़ान संचालन किया गया तथा अनेक सैन्य विमानों को तैनात किया गया। संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने बताया कि दोनों चालक दल के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर उतरने के कारण बचाव कार्य जटिल हो गया था। इसके बावजूद तत्काल खोज अभियान प्रारम्भ कर दिया गया। US Military News

पहले पायलट को दिन के समय बचा लिया गया, जबकि दूसरा अधिकारी—जो हथियार प्रणाली अधिकारी था—गंभीर रूप से घायल अवस्था में दुर्घटना स्थल से काफी दूरी पर उतरा और शत्रु बलों से घिरे क्षेत्र में फंस गया। उसे सुरक्षित निकालने के लिए विशेष रणनीति के साथ दूसरा अभियान संचालित किया गया। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार इस विस्तारित अभियान में कुल 155 सैन्य विमान शामिल किए गए, जिनमें बमवर्षक, लड़ाकू विमान, ईंधन आपूर्ति टैंकर तथा बचाव विमान सम्मिलित थे। इस दौरान शत्रु की खोज गतिविधियों को भ्रमित करने हेतु विशेष सैन्य योजना भी लागू की गई।

बचाव अभियान के दौरान ए-10 समर्थन विमान, ड्रोन तथा हेलीकॉप्टरों ने संयुक्त रूप से कार्य किया

जॉन रैटक्लिफ ने कहा कि यह अभियान समय और सटीकता पर आधारित था। उन्होंने इसकी तुलना रेगिस्तानी क्षेत्र में अत्यंत सूक्ष्म वस्तु की खोज से की और बताया कि इसमें उन्नत तकनीक तथा मानवीय स्रोतों का व्यापक उपयोग किया गया। घायल अधिकारी का स्थान सुनिश्चित होने के बाद रात्रि के समय अत्यधिक जोखिम के बीच अंतिम बचाव अभियान प्रारम्भ किया गया। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इसे अत्यंत उच्च जोखिम वाला अभियान बताते हुए कहा कि अधिकारी ने अपना संकेतक सक्रिय करने के पश्चात एक संक्षिप्त संदेश भेजा—“ईश्वर कृपालु है।”

बचाव अभियान के दौरान ए-10 समर्थन विमान, ड्रोन तथा हेलीकॉप्टरों ने संयुक्त रूप से कार्य किया। शत्रु की गोलीबारी के बावजूद सभी सैन्य कर्मियों ने साहसपूर्वक अभियान को सफल बनाया और किसी भी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी बताया कि कुछ सैन्य अधिकारियों ने अभियान के जोखिम को देखते हुए प्रारम्भ में आपत्ति व्यक्त की थी। उन्होंने मीडिया रिपोर्टिंग पर भी चिंता व्यक्त की, क्योंकि इससे शत्रु पक्ष सतर्क हो गया था और खोज गतिविधियाँ तेज कर दी गई थीं।

अधिकारियों के अनुसार हाल के सप्ताहों में ईरान के विरुद्ध व्यापक स्तर पर सैन्य अभियान चलाया गया, जिसमें हजारों हवाई अभियानों को अंजाम दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि शत्रु क्षेत्र से अपने सैनिकों को सुरक्षित वापस लाना किसी भी सेना के लिए सबसे कठिन अभियानों में से एक होता है और इसके लिए वायु, स्थल तथा खुफिया इकाइयों के बीच उच्च स्तर के समन्वय की आवश्यकता होती है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से सामरिक तनाव बना हुआ है, जिसके प्रमुख कारण परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सैन्य गतिविधियों को लेकर मतभेद रहे हैं। US Military News

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