पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज ने सांगला हिल (आज कल पाकिस्तान) में सभी सत्संगियों के साथ मिलकर सत्संग घर (डेरा) बनाने का विचार किया। कुछ लोगों ने डेरा बनाने का विरोध भी किया व बहुत सी अड़चनें भी पैदा की गर्इं लेकिन आप जी ने अपनी मधुर वाणी व रूहानी तेज के प्रभाव के साथ उन सभी का मन जीत लिया व डेरा बनाने के लिए सभी को तैयार भी कर लिया। आखिर डेरा बनकर तैयार हो गया। उस समय आप जी ने अपने प्यारे मुर्शिद पूजनीय बाबा सावण सिंह जी महाराज के जन्म दिन का भंडारा मनाने का फैसला किया।
उन दिनों में डेरे के नजदीक ही एक चलता फिरता सिनेमाघर (रंगमंच) था। कुछ श्रद्धालुओं ने सिनेमाघर के मालिक से जन्म दिन के भंडारे के दिन एक रात के लिए सिनेमा न चलाने की विनती की। इस पर सिनेमाघर के मैनेजर ने अपनी नाराजगी जताते कहा कि उन्होंने प्रशासन से स्वीकृति ले रखी है। उसने कहा कि वह कमेटी को किराया भी दे रहा है तो फिर सिनेमा कैसे बंद किया जा सकता है। पूजनीय मस्ताना जी ने दूसरी बार कुछ श्रद्धालुओं को यह कहकर भेजा कि सिनेमा मैनेजर का जो भी वित्तीय नुक्सान होगा, वह उसकी पूरी भरपाई करेंगे। लेकिन अड़ियल सिनेमा मैनेजर नहीं माना। सत्संगियों ने उसे मनाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन उसके कानों पर जूं तक नहीं सरकी। जब आप जी को यह सब बताया गया कि तो आप जी ने सबकुछ अपने मुर्शिद पर छोड़ दिया।
अगले दिन जब सिनेमा चलाने का समय हुआ तो सिनेमा नहीं चला। कहा जाता है कि जरनेटर सेट ही खराब हो गया। दूसरा दिन भी उसी तरह बीत गया। नया जरनेटर सेट भी लाया गया, फिर भी सिनेमा नहीं चला। इस तरह उस मैनेजर का अहंकार चकनाचूर हो गया व उसने अपने किए पर पछतावा किया। आप जी ने कई सत्संग कर उस क्षेत्र में मालिक के नाम का खूब डंका बजाया।