नशे के दैत्य का विकराल होता रूप

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गत दिवस जालंधर में घटित दिल-दहलाने वाली घटना ने नशे की भयावहता को उजागर किया है। एक नशेड़ी युवक ने अपनी पत्नी, बच्चों सहित परिवार के पांच सदस्यों को जिंदा जला दिया। यह दर्दनाक घटना बताती है कि नशे ने समाज को बुरी तरह से जकड़ लिया है। नशे की समस्या को लेकर सरकारें नाकाम साबित होती दिख रही हैं, जो समाज व सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने नशे के कहर को युवा शक्ति को कमजोर करने का अघोषित युद्ध करार दिया है। नशे ने हर स्तर पर सामाजिक व सरकारी सिस्टम में सेंध लगा दी है।

भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजाना पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हेरोइन की सप्लाई हो रही है। हाल यह है कि पुलिस रोजाना नशे की खेप पकड़ रही है लेकिन कई पुलिस कर्मी भी नशा तस्करी में संलिप्त हैं। जेलों में नशे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। यह भी सच्चाई है कि यह पूरा कारोबार पुलिस और नशा तस्करों की मिलीभगत से चल रहा है। पंजाब की एक जेल का डिप्टी सुपरडैंट नशा तस्करी करता गिरफ्तार हो चुका है। समस्या इसी कारण गंभीर है कि नशा रोकने वाले ही नशा बेच रहे हैं। कई जगहों पर परेशान होकर लोगों ने पुलिस को सूचना भी दी कि गांव में नशे के एजेंट घूम रहे हैं।

जब कार्रवाई नहीं हुई तब लोग खुद ही एजेंटों को पकड़कर पीट देते हैं। रोजाना ही नशे की ओवरडोज से मौतें हो रही हैं और नशा करने के आदी युवक नशे के लिए अपने घर का सामान व बर्तन तक बेच रहे हैं। यहां तक कि गांवों में नशेड़ियों ने पंचायती नलों को उखाड़कर बेच दिए हैं। सरकारी व गैर-सरकारी नशा छुड़ाऊ केंद्र खुले हैं लेकिन नशेड़ी इलाज बीच में छोड़कर नशा छुड़ाऊ केंद्रों की दीवारें फांदकर फरार हो रहे हैं। दरअसल, यह समस्या बहुत गंभीर व जड़ जमा चुकी है।

पश्चिमी संस्कृति व गिरते सामाजिक मूल्यों ने देश की सरलता, सादगी, आत्मिकता को दरकिनार कर अमीर बनने की संस्कृति को केवल मौज-मस्ती करने का विषय बनाकर रख दिया। राजनीतिक गिरावट के कारण युवा पीढ़ी विदेशी संस्कृति की चकाचौंध में आकर बुराइयों में लिप्त होती जा रही है। मामला केवल पुलिस प्रबंध के मजबूत या नशा तस्करों को सजाएं दिलाने से हल नहीं होगा बल्कि इसके लिए धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मोर्चे पर जंग लड़नी होगी। हर घर को धर्म व संस्कृति की मजबूत दीवारों के साथ सुरक्षित करना होगा। माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों को घर मेें ऐसा माहौल बनाना होगा कि बच्चा नशे से नफरत करे। दूध, घी, लस्सी जैसी पारंपरिक खुराकों का प्रयोग बढ़ाने के लिए सरकारी व निजी स्तर पर मुहिम छेड़नी होगी। विरासत के साथ जुड़ा हुआ युवा ही नशों से रहित हो सकता है।

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