साध-संगत की अरदास: पापा जी आप हमेशा के लिए हमारे बीच आ जाइये

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कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) की साध-संगत ने जीता सबका दिल

  • पूज्य गुरु जी ने दिया आशीर्वाद
  • भारी तादाद में पहुंची साध-संगत
  • पूज्य गुरु जी ने आज लाखों लोगों का नशा छुड़वाया

कुशीनगर यूपी (सच कहूँ न्यूज)। मंगलवार को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने आॅनलाइन गुरुकुल के माध्यम से शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा से साध-संगत के सवालों के जवाब दिए। इससे पहले बड़ी संख्या में लोगों की बुराइयां व नशा छुड़वा रामनाम से जोड़ा।  पूज्य गुरु जी कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) की साध-संगत से रूबरू हुए। कार्यक्रम के दौरान कुशीनगर की साध-संगत ने कहा कि पापा जी आप हमेशा के लिए हमारे बीच आ जाइये।

बहुत अच्छे लग रहे हो बच्चो

पूज्य गुरु जी ने फरमाया बहुत आशीर्वाद, बहुत अच्छे लग रहे हो बच्चो, आप हमारे बेटा, बेटियां, रंग-बिरंगे आपने अपने परिधान उसके अकोरडिंग, कलचर के अकोरडिंग पहन रखे हैं, हाथों पे थालियां है, पूरे देश की एक शान है, ‘आरती की थालियां सजाके बेटियां, ये ही तो हम सुनाया करते हैं, पवित्र वेदों में इसका भी बहुत बड़ा मिनिंगस है कि उसमे घी के वो दीये जलते थे, उससे खुशबु का आना, एक अलग ही खुशबु आती है और स्वागत किया जाता था, सत्कार किया जाता था, किसी भी मेहमान का, और उससे घर के वैक्टिरियां वायरस भी खत्म होते थे और आने वाले को भी पॉजिटिव वेबस आती थी, कि हां मेरा बहुत सत्कार हुआ है।

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आज वाले बोतल मानते है, ‘बोतल दिखाई ओ ये है सत्कार, तो ये बकवास है ये, राक्षसों का चीज है, राक्षस देते थे ये चीज, बुरा ना मनाना कोई देने वाला भाई कि मुझे राक्षस कह दिया, हम तो कहते हैं कि हमारे पुराने टाइम में, हमारे पवित्र वेदो के अकोरडिंग ये नशा, ये चीजें तब पेश करते थे, तो राक्षस, हमारे तो होता था कि ये दीये, घी के लगाके पवित्र वेदों में लिखा है, ऐसे आरती उतारी जाती थी, ताकि उसको खुशबु आए, उसके अंदर भी पॉजिटिव वेबस आए, घर के वैक्टिरियां वायरस भी खत्म। बहुत अच्छा लगा बच्चों, हमारे पूरे भारत में हम जब-जब जुड़ रहे हैं, हर जगह यहां तक कि विदेशों में भी दीये जला रखे हैं बच्चों ने, बड़ा अच्छा लगता है। आशीर्वाद बेटा जी।

ये बच्चे दिल के टुकड़े, अंखियों के तारे हैं हमें जान से प्यारे: पूज्य गुरु जी

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हमारे लिए हमारे बच्चे, जितनी भी साध-संगत है, करोड़ों, वो सबसे बड़ा अवॉर्ड है, क्योंकि वो बच्चे और लोगों का नशा छुड़ा रहे हैं, और समाज का सुधार कर रहे हैं, इससे बड़ा अवार्ड, हम हमेशा कहते हैं कि ये दिल के टुकड़े, अंखियों के तारे हैं हमें जान से प्यारे। हमारे बच्चे हमारी साध-संगत जितनी भी है, इससे भी बढ़कर प्यारे हैं, कोई शब्द नहीं, कोई अल्फाज नहीं, हम बता सके, क्योंकि नि:स्वार्थ भावना से प्रेम करना हमने सिखाया और ये बच्चे नि:स्वार्थ भावना से जा-जा के, लोगों के घरों से, उनको लेके आते हैं ताकि बुराइयां छोड़े दे, नशा छोड़ दे, आज के युग में कौन है ऐसा, जो बिना मतलब किसी के घर जाता हो, ये हमारे बच्चे जाते हैं, सारे, क्यों ना हो जान से प्यारे, अंखियों के तारे। बहुत आशीर्वाद बेटा बाकी राम जी की रजा वो जैसा सतगुरु मौला शाह सतनाम, शाह मस्तान चाहेगे, फकीरो का काम उसकी रजा में मानना है और वो जरूर सुनते हैं, सबकी सुनते हैं।

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