प्राकृति पशु एवं मनुष्यता

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प्राकृति मनुष्य व हर जीव प्राणी को जीवन जीने की परिस्थितियां उपलब्ध करवाती है। किसी जीव से उसका जीवन छीन लेने का मनुष्य को कोई अधिकार नहीं है। पशु एवं पंक्षी भी इस प्रकृति की सुंदरता हैं। फिर जो पशु पक्षी मनुष्य के लिए वरदान जैसे हों, उनकी हत्या करना अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर जोर दिया है। देश की आबादी का एक बड़ा भाग गाय को बेहद सम्मान देता है। देश की संस्कृति ही ऐसी है कि उपयोगी पशुओं को आम जन अपने परिवारिक सदस्यों की तरह रखते हैं। बैल के मर जाने पर भी किसान उसे कसाई अथवा चर्मकारों को नहीं देते थे, बल्कि उन्हें मानवीय शरीर की तरह सम्मान देकर दफनाया जाता रहा है।

देश में गौहत्या के खिलाफ जोरदार लहर है, लेकिन केरल में कुछ सिरफिरे कांग्रेसी वर्कर्स ने सार्वजनिक तौर पर एक बछड़े का वध कर अपने आपको असभ्य प्रदर्शित किया। जबकि कांग्रेस की नीति तो महात्मा गांधी की शिक्षाओं को मानने वाली है, जिन्होंने इस देश में अहिंसा का पाठ पढ़ाने में अपना पूरा जीवन लगा दिया।

कांग्रेस ने बुद्धिमानी का परिचय दिया कि ऐसे स्वार्थी वर्कर्स से अपना पिंड छुÞडवा लिया और उन्हें बर्खास्त कर दिया। देश के बड़े राष्ट्रीय दल गौहत्या के खिलाफ हैं। हालांकि कई गौरक्षक दलों की हिंसा व लूटपाट की घटनाएं निंदाजनक भी हैं,लेकिन सार्वजनिक तौर पर गौरक्षकों का विरोध गौवध करके नहीं किया जाना चाहिए। गाय को किसी धर्म विशेष के साथ जोड़ कर देखना अज्ञानता है।

गाय के बारे में चिकित्सा विज्ञान के बहुत से शोध हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं कि गाय का दूध-मूत्र बेहद उपयोगी हंै। गाय का रूदन व खून बेहद हानिकारक हंै। गौरक्षा के साथ-साथ देश में हर तरह के जीवों की रक्षा की जाए। वर्तमान समय में मनुष्य के अतिरिक्त सब जीवों का अस्तित्व खतरें में है। प्रति वर्ष सैंकड़े प्रजातियां इस पृथ्वी से लुप्त हो रही हैं।

अत: प्राकृतिक संतुलन की दृष्टि से भी जीवों की रक्षा किया जाना अब जरूरी हो गया है। अत: पशुओं पर राजनीति न हो। पशु अर्थव्यवस्था को भी चलाते हैं। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से पशु राष्ट्र के लिए उपयोगी हैं। अत: उन्हें धर्म, जाति से ऊपर उठकर बचाया जाए।

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