नेकी-भलाई की सोहबत करें

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सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इस घोर कलियुग में नेकी-भलाई की संग-सोहबत करें, सत्संग सुनें, वो ही सर्वोत्तम है। इस संसार में लोग मनमते बहुत ज्यादा चलते हैं। अगर आप उनका लगातार संग करते हैं, सोहबत करते हैं तो यकीनन आप भी मन के हाथों मजबूर हो जाएंगे। इन्सान के अंदर जब मन शैतान हावी होता है, मन बहुत ही शातिर हो जाता है। जो लोग मन की बात सुनते हैं, वो उसकी शातिराना चालों में आ जाते हैं।

मनमते लोग बातें ही ऐसी लच्छेदार और घुमाकर करते हैं कि इन्सान उनसे बच नहीं पाता। इसलिए जितना संभव हो, ऐसे लोगों से बच कर रहें। ये तभी संभव है, जब आप सत्संग सुनकर अमल करें। वरना अपने आप बच पाना बहुत मुश्किल है। क्योंकि मनमते लोग आपकी वो रग पकड़ेंगे, जो दुखती रग है। या यूं कहें वो आपकी कमजोरी को देख लेते हैं, या कहीं से पता कर लेते हैं और फिर आपको घेरते हैं और आप चारों खाने चित्त हो जाते हैं और आप उलझन में फसंते चले जाते हैं। आप जी ने फरमाया कि सत्संग सर्वोत्तम है। प्रभु, मालिक के नाम का संग करो, ताकि उसकी तमाम खुशियों और दया मेहर, रहमत प्राप्त कर सको।

 

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