सच्चे दाता का है ये कहना, संयम है जन जन का गहना
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सच्चे दाता का है ये कहना,
संयम है जन जन का गहना।
जिस जिस ने इसको पहना,
सीख जाए वो सुख से रहना।

हमारे सर्व धर्म यही बताते हैं,
सुनी बातों पर त्वरित प्रतिक्रिया न देने का भाव जगाते हैं।
पहले तोलो फिर बोलो की युक्ति सिखाते हैं।

आज के समय में व्यक्ति जरा सी बात पर आपा खो रहा है,
संयम न करके झगड़े फसाद व जुल्मो सितम को ढो रहा है।

ज्ञानयोगी न हो केवल कर्मयोगी जो बन जाता है,
जरा सी ही बात पर हो उतावला वो झगड़ने को अतुराता है।
बाद में पश्चाताप के सिवा बाकी न कुछ रह जाता है।
बृजेश कुमार इन्सां ब्लॉक प्रेमी सेवक रूडकी (हरिद्वार)
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