Chirag Yojana News: शिक्षा का नया सवेरा: निजी स्कूलों में चिराग जलाएंगे सरकारी स्कूलों के मेधावी छात्र

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13 से 30 मार्च के बीच विद्यार्थी अपनी पसंद के स्कूलों में ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे

अंबाला (सच कहूँ न्यूज)। Chirag Yojana Update: हरियाणा में शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में चिराग योजना एक मील का पत्थर साबित हो रही है। शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए निजी स्कूलों के द्वार सामान्य पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों के लिए खोलने की तैयारी पूरी कर ली है। इस योजना के तहत कक्षा 6वीं से 12वीं तक के दाखिलों का आधिकारिक बिगुल फूंक दिया गया है, जिससे उन अभिभावकों में उम्मीद की नई किरण जगी है जो अपने बच्चों को संसाधनों से संपन्न निजी विद्यालयों में पढ़ाने का सपना देखते हैं। Chirag Yojana News

10 मार्च तक स्कूलों में रिक्तियों को स्कूलों के सूचना पटल पर भी प्रदर्शित करना होगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। 13 से 30 मार्च के बीच विद्यार्थी अपनी पसंद के स्कूलों में आॅनलाइन आवेदन कर सकेंगे। यदि सीटों से अधिक दावेदार सामने आते हैं, तो 1 से 5 अप्रैल के बीच अभिभावकों के सम्मुख ड्रॉ के माध्यम से भाग्य का फैसला होगा।

योजना के लिए पात्रता

इस योजना का लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जिनकी पारिवारिक आय 1.8 लाख रुपये या उससे कम है और जिन्होंने वर्तमान सत्र में सरकारी स्कूल से शिक्षा ली है। विभाग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रत्येक निजी स्कूल में दाखिला प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक सरकारी नॉमिनी तैनात किया जाएगा जो पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगा। चयनित छात्रों की सूची 30 अप्रैल तक अपडेट कर दी जाएगी।

जहाँ एक ओर बड़े छात्र दाखिले की तैयारी में हैं, वहीं प्राथमिक कक्षाओं, बालवाटिका-3 से 5वीं के लिए वार्षिक परीक्षाओं का समय आ गया है। 16 से 25 मार्च तक चलने वाली इन परीक्षाओं में निपुण दक्षताओं का मूल्यांकन होगा। 16 मार्च को पहली की अंग्रेजी, दूसरी की गणित और तीसरी की हिंदी परीक्षा से इस अभियान की शुरूआत होगी।

डीईओ का कथन | Chirag Yojana News

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ज्योति रानी ने स्पष्ट किया कि दाखिला प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए विभाग प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को पहले रिक्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करना होगा, जिसके बाद ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। साथ ही, प्राथमिक परीक्षाओं को लेकर उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे जीरो पीरियड का सदुपयोग कर कमजोर विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर को सुधारें, ताकि जिला स्तर पर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकें।

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