विदेश से लौटे दंपती ने बदली प्रेमपुरा गांव की तस्वीर  

कैथल का प्रेमपुरा गांव बना विकास की मिसाल, सरपंच दंपती ने निजी कोष से बदली तस्वीर

Sarvesh Kumar Picture
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कैथल (सच कहूँ/कुलदीप नैन)। Kaithal News: विकास केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और समाज के प्रति समर्पण से भी संभव है। इसका जीवंत उदाहरण कैथल जिले का प्रेमपुरा गांव है, जहां एक शिक्षित महिला सरपंच और उनके एनआरआई परिवार की सोच ने ग्रामीण विकास की नई मिसाल कायम की है। कभी विदेश में रहने वाली एमए शिक्षित सरपंच परविंद्र कौर और उनके पति सतनाम सिंह ने गांव लौटकर विकास को अपना मिशन बनाया। 

बीते पांच वर्षों में दंपती ने निजी कोष से करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर गांव में आधारभूत सुविधाओं, सामाजिक कार्यों और जनसेवा को नई दिशा दी है। उनके योगदान को देखते हुए जिला प्रशासन भी दो बार सम्मानित कर चुका है। प्रेमपुरा आज स्वच्छता, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए पूरे क्षेत्र में पहचान बना चुका है। गांव की गलियां और सड़कें शहरों को भी मात देती हैं। कचरा प्रबंधन के लिए प्लांट, सामुदायिक केंद्र, पार्क, ओपन जिम और जल्द शुरू होने वाली ई-लाइब्रेरी गांव की आधुनिक सोच को दर्शाती हैं।

महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के लिए गांव में 28 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा रात्रि सुरक्षा के लिए गार्ड नियुक्त किया गया है। वहीं शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सरपंच ने उल्लेखनीय पहल की है। कई नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन किया गया, जबकि जरूरतमंद लोगों की आंखों के आॅपरेशन, गरीब परिवारों की सहायता और बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग दिया गया।

गांव में अपराध और नशे के लिए कोई जगह नहीं

गांव के विकास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां अपराध और नशे के लिए कोई जगह नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले आठ वर्षों से गांव में किसी प्रकार की एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। छोटे-मोटे विवाद भी आपसी भाईचारे से सुलझा लिए जाते हैं। नशा विरोधी जागरूकता अभियान ने युवाओं को सकारात्मक दिशा दी है।

गांव में ई-लाइब्रेरी खोलने की चल रही प्रक्रिया 

एनआरआई गांव के रूप में पहचान रखने वाले प्रेमपुरा की आबादी करीब 2500 है और मतदाता लगभग 1100।, जबकि 300 से अधिक ग्रामीण विदेशों में रहते हैं। इसके बावजूद गांव से उनका जुड़ाव बना हुआ है और सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है। गांव की पंचायत के पास आमदनी का कोई बड़ा साधन नहीं है। करीब 150 एकड़ जमीन को पट्टे देने से जो आय होती है, वह गलियों सहित अन्य विकास कार्यों पर खर्च होती है। सरकार में पैरवी कर गांव के निकट से गुजर रही ड्रेन पर 22 करोड़ रुपये से पुल बनवाया गया है। गांव में पार्क और ओपन जिम बनाया गया है।

ई-लाइब्रेरी खोलने की प्रक्रिया चल रही है।विदेश में रहते हुए भी मन हमेशा गांव के विकास के लिए समर्पित रहा। इसी सोच के साथ उन्होंने गांव लौटकर चुनाव लड़ा और ग्रामीणों के विश्वास से सरपंच बनीं। वह अब तक अपने निजी कोष से 50 लाख रुपये खर्च कर गांव का मुख्य द्वार बनवाया। 18 लाख रुपये से एंबुलेंस खरीदी, जिससे आसपास के 10 गांव के लोगों को फायदा हो रहा है। इसकी सुविधा नि:शुल्क है।
-परविंद्र कौर, सरपंच

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