Crop Verification: फसल सत्यापन अभियान की रफ्तार धीमी, तीन दिनों में सिर्फ 55.50 हजार की जांच

2.50 एकड़ की जांच बाकी

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Crop Verification:  सरसा  (सच कहूँ न्यूज)। खेतों में खड़ी फसल और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर पकड़ने के लिए शुरू किया गया सत्यापन अभियान अभी रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। तीन दिन में जिले के 3,06,009.649 एकड़ कृषि रकबे में से सिर्फ 55,505.644 एकड़ का सत्यापन हो सका है। यानी अब तक 18.14 प्रतिशत रकबे की ही जांच पूरी हुई है। दूसरी ओर 2,50,504.005 एकड़ यानी 81.86प्रतिशत रकबा अभी सत्यापन का इंतजार कर रहा है।

 डबवाली ने पकड़ी रफ्तार, रानियां सबसे पीछे

तहसीलवार आंकड़ों में डबवाली की प्रगति सबसे बेहतर है। यहां 37,799.22 एकड़ में से 9,860.331 एकड़ का सत्यापन हो चुका है, जो 26.09प्रतिशत है। इसके विपरीत रानियां में कुल रकबे का महज 13.51% ही सत्यापित हो पाया है। दोनों तहसीलों के बीच सत्यापन की रफ्तार में 12.58 प्रतिशत अंक का अंतर है। सरसा में 16.01प्रतिशत और नाथूसरी चौपटा में 14.79 प्रतिशत रकबे का सत्यापन हुआ है। दोनों की प्रगति जिले के औसत 18.14प्रतिशत से भी नीचे है।

 125 पटवारी, फिर भी 81.86प्रतिशत रकबा बाकी

जिले में करीब 125 पटवारियों को खेत-खेत जाकर सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें पोर्टल पर दर्ज फसल का मौके पर खड़ी फसल से मिलान करना है। बड़े कृषि रकबे और हर खेत का मौके पर निरीक्षण करने की प्रक्रिया के चलते सत्यापन में समय लग रहा है। अब विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बचे हुए 2.50 लाख एकड़ का सत्यापन पूरा करना है।

सैटेलाइट में कुछ, खेत में कुछ तो पकड़ेगा अंतर

अभियान के तहत सैटेलाइट सर्वे में दर्ज फसल और मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दर्ज फसल का मिलान किया जा रहा है। मौके पर यह देखा जा रहा है कि किसान के रिकॉर्ड में दर्ज फसल वास्तव में खेत में खड़ी है या नहीं। दूसरी फसल, खाली जमीन या बागवानी क्षेत्र में अलग फसल दर्ज होने जैसी स्थिति भी जांच के दौरान सामने आ सकती है। 

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