शिक्षा और रोजगार
डिप्टी सीएमओ ने खरखौदा सामान्य सवाल का किया औचक निरीक्षण, कई कर्मचारी मिले गैरहाजिर
डिप्टी सीएमओ ने सरकारी अस्पताल खरखौदा और स्वास्थ्य केंद्र सिसाना का औचक निरीक्षण किया
खरखौदा (सच कहूँ न्यूज़)। Kharkhoda News: डिप्टी सीएमओ डॉ. आशा सहरावत ने सरकारी अस्पताल खरखौदा व सिसाना का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति, इमरजेंसी सेवाओं, लेबर रूम, ओपीडी, नेत्र विभाग, दंत विभाग, आयुष सेवाओं सहित अस्पताल के शौचालयों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कई खामियां सामने आईं।
डिप्टी सीएमओ ने बताया कि दीपक जो कि लगातार 17 दिनों से अनुपस्थित चल रहा हैं, जबकि विकास, सपना व अनुज व मंजीत भी मंगलवार को ड्यूटी से अनुपस्थित मिले। उन्होंने बताया कि एचकेआरएन के सुपरवाइजर द्वारा कर्मचारियों की अनुपस्थिति के संबंध में लिखित रूप से उच्च अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, लेकिन अभी तक इस मामले में उच्च अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
निरीक्षण के दौरान ड्यूटी पर मौजूद कुछ कर्मचारियों द्वारा निर्धारित ड्रेस कोड के अनुसार वर्दी नहीं पहनने की बात भी सामने आई। वहीं अस्पताल के शौचालयों की सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। अस्पताल में सीसीटीवी कैमरों के संबंध में पूछे गए सवाल पर डिप्टी सीएमओ ने कहा कि सीसीटीवी को ठीक नहीं कराया जा रहा है, क्योंकि कैमरे चालू होने पर कर्मचारियों की खामियां और लापरवाही रिकॉर्ड हो सकती हैं। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को भविष्य में लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए तथा कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों के संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
डिप्टी सीएमओ ने खरखौदा चिकित्सा प्रभारी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि चिकित्सा प्रभारी को प्रतिदिन अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने व्यवस्थाओं में सुधार और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डिप्टी सीएमओ ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिसाना का भी निरीक्षण किया। यहां दोनों चिकित्सा अधिकारी अनुपस्थित मिले और उनके बैठने के कमरों पर ताला लटका हुआ था। इस स्थिति को देखकर डिप्टी सीएमओ ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए।
औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई अनुपस्थिति और व्यवस्थागत खामियों ने स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारियों की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी।