Hathni Kund Barrage: हर साल करोड़ों खर्च होकर भी आखिर क्यों नहीं हो रहा है काम पूरा

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168 करोड़ की लागत से बने बैराज पर एक डायाफ्राम वाल का ही ठेका ही 146 करोड़ का

खिजराबाद (सच कहूँ/राजेन्द्र कुमार)। Khizrabad News: हथिनीकुंड बैराज पर लगभग 146 करोड़ की लागत से डायाफ्राम वाल का निर्माण चल रहा है, पिछले वर्ष इसी साइट पर स्टड आदि लगाने का कार्य किया जा रहा था, हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी बैराज के डाऊन स्ट्रीम में चलने वाला कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है, जिस साइट को पहले पक्का किया गया,अब उसे डिसमेंटल किया उसकी खुदाई का काम किया जाएगा। Yamunanagar News

168 करोड़ की लागत से बने हथिनीकुंड बैराज की मेंटनेस अन्य कार्य में बीते कुछ वर्षों में करोड़ों का बजट खर्च किया जा चुका है, मगर यहां पर रिपेयर का काम पूरा नहीं हो पा रहा है। बीते वर्ष की कई करोड़ खर्च कर यहां पर ब्लाक आदि लगाए गए थे। अब की बार यहां पर 146 करोड़ की लागत से बैराज के नीचे की ओर डायाफ्राम वाल के निर्माण का टेंडर दिया गया। जिसका काम भी शुरु हो गया है ओर इसको 30 जून तक पूरा किया जाना है। मगर सवाल यह है कि आखिर हर वर्ष डाऊनस्ट्रीम में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद रिपेयर का काम पूरा क्यों नहीं हो रहा है।

जानकार बताते हैं कि जिस साइट पर डायाफ्राम वाल का निर्माण किया जाना है वहां पर ही पिछले वर्षों में ही काम किया गया था,अब उसको डिसमेंटल करके वहां से मैटिरियल निकाल कर दूर भेजा जा रहा है, जानकार बताते है कि यह डायाफ्राम वाल की गहराई 21 मीटर तक होनी है। सवाल यह है बीते चार पांच वर्षों में जो काम बैराज एरिया में हुआ है उसका वर्तमान स्टेटस क्या है क्या वह बचा हुआ या फिर वह पानी में बह गया है, आखिर क्या काम की वैलिडिटी एक साल भी नहीं होती है। Yamunanagar News

168 करोड़ से हुआ था बैराज का निर्माण उससे अधिक मेंटनेस पर हो चुका है खर्च

इस बैराज का निर्माण 1996 से 1999 के बीच कुल 168 करोड़ की लागत से हुआ था, मगर उसकी मरम्म्त पर लगातार जो खर्च हो रहा है वह कहीं से हजम नहीं होता है। इस बार का टेंडर जिससे डायाफ्राम वाल आदि का काम होना है वह ही 146 करोड़ के करीब है यानी जितने में पूरे बैराज का निर्माण हुआ उतना एक डायाफ्राम वाल पर खर्च हो रहा है।

अब यह वाल पूरी होने के बाद काम खत्म हो जाएगा, ऐसा नहीं लगता है तो आखिर कई राज्यों के लिए महत्वपूर्ण इस बैराज का काम टेक्निकल एक्सपर्टस की देख-रेख में किया जाए ओर बीते आठ-दस वर्षों में हुए कामों पर हुए खर्च का स्पैशल आडिट करवाया जाए ताकि उस खर्च किए गए बजट का यूटिलाइजेशन सही प्रकार से हुआ या नहीं इसका पता चल सके। Yamunanagar News

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