स्कूलों में खामियां मिलीं तो खैर नहीं, शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश
जर्जर भवन, गंदे शौचालय और खराब पेयजल व्यवस्था पर होगी सीधी कार्रवाई
सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। Sirsa News: सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिक्षा विभाग ने अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए सख्त निगरानी के निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश स्तर पर हुई उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद जिला शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों में विशेष निगरानी अभियान शुरू करने के आदेश दिए हैं। जर्जर भवनों, गंदे अथवा बंद पड़े शौचालयों, खराब पेयजल व्यवस्था, निष्क्रिय डिजिटल उपकरणों और सुरक्षा मानकों में कमी को लेकर विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से खंड शिक्षा अधिकारियों, सीआरसी, जूनियर इंजीनियरों, सब डिविजनल इंजीनियरों और विद्यालय मुखियाओं को अपने-अपने स्तर पर व्यापक निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल परिसर का कोई भी हिस्सा बच्चों के लिए खतरा न बने।
विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाएं विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। सभी विद्यालयों में जर्जर भवनों, शौचालयों, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं की जांच के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
— सुभाष फुटेला, जिला शिक्षा अधिकारी, सरसा।
मानसून से पहले स्कूलों को किया गया अलर्ट
बरसात का मौसम शुरू होने से पहले विभाग ने सभी स्कूलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। स्कूल परिसरों में जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान, नालियों की सफाई, छतों और दीवारों की जांच, खुले गड्ढों को सुरक्षित करने तथा बिजली व्यवस्था की तकनीकी जांच कराने को कहा गया है। विभाग चाहता है कि मानसून के दौरान किसी भी स्कूल में जलभराव, करंट या भवन क्षति जैसी घटनाएं विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए खतरा न बनें। इसके लिए स्कूल स्तर पर निगरानी टीमें गठित करने की भी सलाह दी गई है।
स्मार्ट क्लास से लाइब्रेरी तक, हर संसाधन का देना होगा हिसाब
शिक्षा विभाग ने यह भी पाया है कि कई स्कूलों में उपलब्ध स्मार्ट बोर्ड, स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट, विज्ञान प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय अपेक्षित स्तर पर उपयोग नहीं हो रहे। इसलिए अब इन संसाधनों के नियमित उपयोग की निगरानी की जाएगी। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि गणित, विज्ञान, भाषा और खेल किट सहित सभी शिक्षण-अधिगम सामग्री को कक्षाओं और गतिविधियों में प्रयोग किया जाए। विभाग का उद्देश्य है कि सरकारी स्कूलों में उपलब्ध संसाधन केवल रिकॉर्ड तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ सीधे विद्यार्थियों को मिले। इस बार शिक्षा विभाग ने जवाबदेही का दायरा बढ़ाते हुए केवल विद्यालय मुखियाओं तक जिम्मेदारी सीमित नहीं रखी है। खंड शिक्षा अधिकारी, सीआरसी, जेई और एसडीई को भी नियमित निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। जर्जर भवनों, शौचालयों, पेयजल, बिजली और अन्य सुविधाओं की निगरानी में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।
सबसे पहले जर्जर भवनों पर चलेगा अभियान
विभाग ने स्कूल मुखियाओं को तत्काल भवनों का निरीक्षण कर असुरक्षित कमरों और जर्जर संरचनाओं की पहचान करने को कहा है। ऐसे भवनों को तुरंत उपयोग से बाहर कर वहां प्रवेश निषेध के बोर्ड लगाने और आवश्यक सुरक्षा घेराबंदी करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी स्कूल में सुरक्षित कक्षों की कमी है तो वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि भवन संबंधी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यही वजह है कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी सीधे संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर तय की जाएगी।
छात्राओं की गरिमा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता
नए निर्देशों में छात्राओं से जुड़ी सुविधाओं पर विशेष फोकस किया गया है। विभाग ने सभी स्कूलों में छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग, साफ-सुथरे और पूरी तरह उपयोग योग्य शौचालय उपलब्ध कराने को अनिवार्य बताया है। शौचालयों में पानी, सफाई, रोशनी और वेंटिलेशन की व्यवस्था हर समय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा छात्राओं के लिए स्थापित सेनेटरी नैपकिन इंसिनरेटर मशीनों को नियमित रूप से संचालित रखने तथा किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है।

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