नूहार मेरे गांव की: हिडिम्बा के नाम से मशहूर गांव हडबोन

नारायणगढ से मात्र 7 किलोमीटर दूर बसा गांव हडबोन 

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नारायणगढ़ (सच कहूँ/सुरजीत कुराली)। Naraingarh News: उपमंडल के गांव हडबोन जो कि राक्षस कुल की हिडिम्बा के नाम से मशहूर है। गांव में मात्र 750 मतदाता हैं व आबादी 2000 के करीब है। गांव के सुदेश धीमान, एवं पूर्व सरपंच बुजुर्ग अमरनाथ व नम्बरदार राम नाथ आदि के अनुसार जिस जगह पर गांव हडबोन बसा है यहां चारो ओर घने जंगल थे। तथा इस जंगल में राक्षस कुल से पैदा हुई हिडिम्बा नामक महिला भी रहती थी। द्वापर युग में जब पांडव बनवास के समय इस रास्ते से निकल रहे थे तो जंगल में एक बट वृक्ष के नीचे जैसे ही पांडव विश्राम करने के लिए रूके तो इस जगह पर उनकी भेंट हिडिम्बा के साथ हुई। जो कि हिडिम्बा इसी पेड पर पींघा करती थी।

हिडिम्बा ने भीम से उसे एक झूंठा देने को कहा इसी वट वृक्ष के बडे टहने पर भीम ने हिडिम्बा को झूंटा भी दिया था जो कि इस जगह का नाम हिडिम्बा पड गया धीरे-धीरे लोग इस जगह पर आकर बसने लग गये जो कि बाद में यह जंगह हडबोन के नाम से मशहूर हो गई। जिस वट वृक्ष के नीचे पांडवों ने विश्राम किया था व भीम ने इस वट वृक्ष के बडे टहने पर हिडिम्बा को झूंठा दिया था वह वट वृक्ष पेड आज भी गांव हडबोन में हरा भरा खडा है पेड के नीचे ग्रामीणों ने हिडिम्बा की मूर्ति भी रखी हुई है तथा उसका एक छोटा सा मन्दिर भी बना रखा है। लोग दूर-दूर से द्वापर  युग से खडे इस वट वृक्ष को देखने के लिए आते हैं। 

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पूर्व सरपंच अमर नाथ, बुजुर्ग नम्बरदार राम नाथ, सरपंच राजीव धीमान

 

क्या कहते है पूर्व सरपंच बुजुर्ग अमर नाथ:

लगभग 95 वर्षीय पूर्व सरपंच बुजुर्ग अमर नाथ ने बताया कि वह गांव हडबोन के लगातार पांच प्लान यानी 25 साल सरपंच बने रहे उसके बाद दस साल दो प्लान पंचायत सदस्य रहे। उनके बाद अर्जन सिंह, धर्मपाल, गुरदास, सुनीता देवी, अमरजीत, रविन्द्र सरपंच रहे और अब सरपंच के मुखिया की बागडोर राजीव धीमान ने संभाल रखी है। 

क्या कहते हैं बुजुर्ग नम्बरदार राम नाथ

बुजर्ग नम्बरदार राम नाथ ने बताया कि पहले उनके गांव में एक नम्बरदार और था जिसकी मृत्यु काफी अरसा पहले हो चुकी है। वह सन 1997 से नम्बरदारी से सम्बन्धित अपनी सेवायें ग्रामवासियों को दे रहे हैं।  

गांव में 9 जातियों का समावेश:-

गांव में जाट, सैनी, लोहार, बाल्मीकी, कश्यप, बनिये, धोबी, पिन्जे व सिक्ख आदि जातियों का समावेश है ग्रामवासी आपस में प्रेम पूर्वक रहते है तथा हर किसी के दुख सुख में भागीदारी निभाते हैं। गांव के कुछ युवा विदेश  भी गये हुये है ग्रामीण खेतीबाडी करते है तथा दुधारू पशुओं को भी पालते हैं।  

क्या बहते हैं सरपंच राजीव धीमान:

सरपंच राजीव धीमान ने कहाकि उनके गांव में निकासी पानी की सबसे बडी समस्या है। पानी निकासी ना होने की वजह से बरसात के दिनों में पानी लोगों के घरों में घुसने का अंदेशा बना रहा है। जिसे वह दूर कराने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। उनके गांव में करीब 50 साल पहले पूर्व सरपंच अर्जन सिंह ने एक पेयजल नलकूप लगवाया था जो कि अब ग्रामीणों व उनके मवेशियों को पानी की कमी के चलते उन्होने गांव में एक और पेयजल नलकूप लगवा दिया है। गांव में सभी गलियां पक्की बनवा दी हैं। उनके गांव में एक प्राईमरी स्कूल, आंगनवाडी बनी हुई है।

गांव मे कमी  है:-

ग्रामवसियों ने कहाकि उनके गांव में किसी भी जाति की कोई धर्मशाला नही है, ना ही कोई मीनी पैलेस है। समुदायिक केन्द्र, पशु अस्पताल व पंचायती भवन भी नही है जिसकी कमी ग्रामवासियों को हमेशा खलकती रहती है तथा उन्हेे विवाह समारोह व अन्य कार्यक्रमों के लिए उन्हे दो चार होना पडता है। 

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