Paid Tribute: शरीरदानी कांता इन्सां को उमड़ी साध-संगत ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि

नामित नामचर्चा में 5 जरूरतमंद परिवारों को दिया राशन

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Paid Tribute: कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र में मानवता की सेवा और शरीरदान की अनूठी मिसाल पेश करने वाली दिवंगत कांता इन्सां के नामित विशेष श्रद्धांजलि नामचर्चा का आयोजन केडीबी रोड़ स्थित नीजि पैलेस में किया गया। इस भावपूर्ण कार्यक्रम में कुरुक्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में लोग शरीरदानी कांता इन्सां को श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे।

डेरा सच्चा सौदा की परंपराओं और 'मानवता भलाई' के सिद्धांतों पर चलते हुए, शोक के इस माहौल को भी परोपकार के कार्य में बदला गया। नामचर्चा के दौरान समाज के अति जरूरतमंद 5 परिवारों की पहचान कर उन्हें एक-एक महीने की संपूर्ण राशन किट भेंट की गई। राशन किट प्राप्त करने वाले परिवारों ने उनको मिली सहायता के लिए डेरा सच्चा सौदा और पूज्य गुरु जी का तहे दिल से आभार व्यक्त किया।

इस मौके पर शरीरदानी कांता इन्सां के पति सतपाल, बेटे वेदप्रकाश, सतीश व विकास, बेटी कुसुम, पुत्रवधू ऊषा, संजीव कौर व बाला  देवी के अलावा रिश्तेदार व डेरा श्रद्धालु उपस्थित थे।  नामचर्चा के दौरान उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण भजनों के माध्यम से दिवंगत आत्मा को अपनी श्रद्धांजलि दी। उपस्थित वक्ताओं ने कांता इन्सां के जीवन और उनके द्वारा किए गए शरीरदान के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह कदम समाज के लिए एक महान प्रेरणा है, जो चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए बेहद मददगार साबित होगा।  

नश्वर शरीर का चिकित्सा शोध के लिए दान कोई आम बात नहीं  डेरा सच्चा सौदा के सच्चे न्रम सेवादार सलिंद्र पाल, कृष्ण इन्सां व कुरुक्षेत्र के प्रेमी सेवक दिनेश इन्सां ने कहा कि कांता इन्सां ने न केवल अपने जीवनकाल में समाज सेवा के कार्य किए, बल्कि मृत्यु के बाद भी अपने नश्वर शरीर को चिकित्सा अनुसंधान के लिए दान देकर एक महान उदाहरण पेश किया है। उनके इस फैसले से चिकित्सा क्षेत्र की पढ़ाई कर रहे छात्रों को काफी मदद मिलेगी, जिससे आने वाले समय में कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

नामचर्चा के समापन पर स्थानीय सेवादारों और जिम्मेदारों ने समाज के अन्य लोगों से भी इस तरह के सेवा कार्यों से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंगदान और शरीरदान आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। जीते-जी रक्तदान और मृत्यु के बाद शरीरदान करके हम समाज को बहुत कुछ दे सकते हैं। Kurukshetra News

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