गांव मट्टदादू के सरपंच प्रतिनिधि आए गरीबों के पक्ष में, कहा- ''गरीबों के आशियानों का भी रखा जाए ख्याल''
सीएम को पत्र लिखकर 15 साल पुराने मकानों का मालिकाना हक देने का सुझाव
गोरीवाला, (सच कहूँ/अनिल)। प्रदेशभर में जोहड़ों और सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे अभियान के बीच गांव मट्टदादू के सरपंच प्रतिनिधि रणदीप सिंह मट्टदादू ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र भेजकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि तालाबों का संरक्षण आवश्यक है, लेकिन इस प्रक्रिया में वर्षों से वहां रह रहे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के हितों की भी अनदेखी नहीं होनी चाहिए। Sirsa News
रणदीप सिंह मट्टदादू ने अपने पत्र में लिखा कि सरकार द्वारा तालाबों की भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं और कई स्थानों पर प्रशासन कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक परिवार प्रभावित हो सकते हैं, जो लंबे समय से इन स्थानों पर बने मकानों में रह रहे हैं। इनमें अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि बिना किसी पुनर्वास योजना के ऐसे मकानों को हटाया गया तो कई परिवार बेघर हो जाएंगे। इससे सामाजिक और मानवीय समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। इसलिए सरकार को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक न्याय को भी ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। Sirsa News
15 साल पुराने मकानों को मालिकाना हक देने का सुझाव
मट्टदादू ने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि जो मकान 15 वर्ष या उससे अधिक समय से बने हुए हैं और जिनमें परिवार लगातार निवास कर रहे हैं, उन्हें विशेष नीति बनाकर मालिकाना हक प्रदान करने पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि इससे गरीब परिवारों को स्थायी आवास का अधिकार मिलेगा और वर्षों पुराने विवादों का समाधान भी संभव हो सकेगा।
पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई गांवों में पुराने जोहड़ समय के साथ आबादी के बीच समा चुके हैं या उनकी मूल संरचना पूरी तरह बदल गई है। ऐसे मामलों में सरकार ग्राम पंचायत की उपलब्ध अन्य भूमि पर नए जोहड़ों का निर्माण करवाने अथवा वैकल्पिक जल संरक्षण व्यवस्था विकसित करने की नीति बना सकती है। इससे तालाब संरक्षण का उद्देश्य भी पूरा होगा और वर्षों से बसे परिवारों को विस्थापन का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। Sirsa News