डोईवाला बल्लेवाला क्रशर जोन में आबादी से पैरा मीटर पैमाइश में हो गया बड़ा खेल!

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प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: यमुनानगर के डोईवाला बल्लेवाला में लगे क्रशर जोन से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने रेवेन्यू और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टोन क्रशरों की आबादी से निर्धारित दूरी को लेकर ऐसी धांधली उजागर हुई है, जिसे सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि बड़े खेल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

डोईवाला क्रशर जोन में एक ही स्थान पर आमने-सामने लगे दो क्रशर जय गणेश स्टोन क्रशर व श्री गणेश स्टोन क्रशर की दूरी को रेवेन्यू विभाग ने अपनी रिपोर्ट में अलग-अलग दर्शा रखी है। श्री गणेश स्टोन क्रशर की दूरी 1300 मीटर ओर उससे भी 50 मीटर ओर आगे लगे जय गणेश की आबादी से दूरी 350 मीटर रेवेन्यू विभाग ने दर्शा रखी है। श्री गणेश क्रशर की दूरी आबादी से महज तीन सौ मीटर है पर रेवेन्यू विभाग के पटवारी ने इसकी दूरी अपनी रिपोर्ट में 1300 मीटर दर्शा रखी है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि दोनों क्रशर एक ही स्थान पर स्थापित हैं। रेवेन्यू विभाग की इस रिपोर्ट ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। Pratap Nagar News

सवाल यह है कि एक ही जगह पर लगे क्रशरों की दूरी में 950 मीटर का अंतर आखिर कैसे आ गया? जानकारों का मानना है कि यह मामला महज नाप-जोख की गलती नहीं, बल्कि नियमों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की गंभीर कोशिश है। यह गड़बड़ी सिर्फ एक क्रशर के पैरामीटर पैमाइश में नहीं है अगर बारिकी से जांच की जाए तो दो दर्जन से ज्यादा क्रशरों की रिपोर्ट गलत बनाई हुई पाई जाएगी। अब सवाल यह है कि इस तरह सरकार की आंखों में धूल झोंक गलत रिपोर्ट बनाने व बनवाने वालों पर क्या कोई कार्रवाई जिला प्रशासन करेगा या नहीं यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

प्रदूषण विभाग भी सवालों के घेरे में | Pratap Nagar News

इस कथित फर्जीवाड़े के बाद अब प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि प्रदूषण विभाग ने बिना किसी फिजिकल वेरिफिकेशन और स्थल निरीक्षण के ही इन स्टोन क्रशरों को सीटीओ (कंसेंट टू ऑपरेट) जारी कर दिया। नियमों के अनुसार, अनुमति से पहले वास्तविक दूरी की जांच अनिवार्य होती है, लेकिन यहां नियमों को कागजों में ही पूरा कर दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्रशर जोन में धूल, शोर और प्रदूषण से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं, खेतों और जल स्रोतों पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं।

उच्चस्तरीय जांच की उठ रही मांग

अब सवाल यह उठता है कि क्या रेवेन्यू और प्रदूषण विभाग की मिलीभगत से क्रशरों को संरक्षण दिया जा रहा है? अगर ऐसा नहीं है, तो फिर इस स्पष्ट विरोधाभास की जिम्मेदारी कौन लेगा? डोईवाला क्रशर जोन का यह मामला उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है। यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो कई अधिकारियों और क्रशर संचालकों की भूमिका बेनकाब हो सकती है। फिलहाल यमुनानगर की जनता यह जानना चाहती है कि नियम कानून सिर्फ कागजों के लिए हैं या आमजन की सुरक्षा के लिए भी। Pratap Nagar News

इस मामले में यमुनानगर प्रदूषण विभाग के आरओ प्रदीप का कहना है कि इस मामले में रेवेन्यू विभाग से दोबारा रिपोर्ट कराई जाएगी अगर अनियमितता पाईं जाती है तो ऐसे सभी स्टोन क्रशरों का सीटीओ कैंसिल किया जाएगा।

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