9 साल की बच्ची से दुराचार और हत्या के मामले में आरोपी को मौत की सजा
बच्ची से दुराचार और हत्या के मामले में आरोपी को मौत की सजा
मैसूरु, एजेंसी। Mysuru News: कर्नाटक के मैसूरु की फास्ट ट्रैक अदालत ने शनिवार को 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में आरोपी कार्तिक को मौत की सजा सुनाई। बच्ची पिछले साल दशहरा उत्सव के दौरान अपने परिवार के साथ गुब्बारे बेचने के लिए मैसूरु आई थी। न्यायाधीश अनिल पी. वाघाडे ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने एक दिन पहले ही आरोपी को इस मामले में दोषी ठहराया था। इस घटना ने कर्नाटक सहित पूरे देश को झकझोर दिया था।
पीड़ित बच्ची का परिवार दशहरा प्रदर्शनी मैदान के सामने, मैसूरु महल के सामने की ओर एक अस्थायी तंबू लगाकर रह रहा था। उत्सव के दौरान परिवार वहीं ठहरा हुआ था। घटना वाले दिन तड़के आरोपी कार्तिक कथित तौर पर बच्ची को उस समय तंबू से बाहर ले गया, जब वह अपने माता-पिता के पास सो रही थी। इसके बाद उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी। बच्ची के शरीर पर चाकू से वार किए जाने के 19 निशान मिले थे।
घटना के बाद नजराबाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआत में पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं था। इसके बाद जांचकर्ताओं ने आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। इसी दौरान एक छोटी-सी फुटेज में एक व्यक्ति को ऑटो रिक्शा से उतरकर संदिग्ध तरीके से घूमते हुए देखा गया। इस फुटेज से जांच को अहम सुराग मिला।
इसके बाद पुलिस ने आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया। कार्तिक मांड्या जिले के श्रीरंगपट्टनम तालुक के सिद्धलिंगपुरा गांव का रहने वाला है। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कार्तिक को इससे पहले एक महिला से दुष्कर्म की कोशिश के मामले में गिरफ्तार किया गया था और वह दो साल जेल में रह चुका था। जमानत पर बाहर आने के बाद वह कथित तौर पर अपने परिवार के पास नहीं लौटा और शराब का आदी हो गया था। वह अलग-अलग जगहों पर घूमता रहता था।
पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर हमला करने और भागने की भी कोशिश की थी। इस दौरान पुलिस ने गोली चलाई, जिससे उसके पैर में चोट लगी। जांच टीम ने अपराध से जुड़े विवरण और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को आरोपपत्र में शामिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील जयवंती ने मामले की पैरवी की और आरोपी के लिए अधिकतम सजा की मांग की।
बच्ची की निर्मम हत्या के बाद इस मामले में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। अदालत के मृत्युदंड सुनाने के फैसले को इस मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।