संगरूर : कैंसर की जकड़ में आया संगरूर का सरकारी अस्पताल

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सरकारी अस्पताल के कमरों का ज्यादातर प्रयोग कर रहा कैंसर अस्पताल का स्टॉफ | Cancer

  • आम बीमारियों वाले मरीजों को भीड़ बढ़ने से इलाज करवाने में हो रही दिक्कत

संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)। जिला संगरूर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल को कैंसर जैसी नामुराद बीमारी ने जकड़ लिया है। इस अस्पताल की इमारत में बनाई एक निजी कंपनी के कैंसर अस्पताल ने सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग को अपने काम के लिए प्रयोग करना शुरू कर दिया है। बेशक कैंसर जैसी नामुराद बीमारी के ईलाज के लिए संगरूर के अस्पताल के साथ एक कैंसर अस्पताल की बड़ी बिल्डिंग बनाई गई है तथा दूर दराज के के मरीजों को भले ही सुविधा हुई है

लेकिन आम बीमारियों का इलाज करवाने आ रहे मरीजों को परेशानियां जरूर हो रही हैं क्योंकि सरकारी अस्पताल के अधिकतर कमरे कैंसर अस्पताल के स्टाफ ने रोक लिए हैं जिस कारण केवल मरीजों को ही नहीं अपितु सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों को भी परेशानी आ रही है। सूत्रों से पता चला है कि कैंसर अस्पताल में जितने मरीज एक महीने में आते हैं, उससे कहीं अधिक संख्या में सरकारी अस्पताल में मरीज आम बीमारियों का इलाज करवाने वाले के लिए पहुंचते हैं।

कैंसर अस्पताल की बिल्डिंग सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग के साथ बनाई गई है लेकिन कैंसर अस्पताल के लिए वह भी कम पड़ रही है, जिससे सरकारी अस्पताल के कमरों को भी कैंसर अस्पताल ने इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। सरकार द्वारा कैंसर अस्पताल को हर स्तर पर सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं लेकिन सरकारी अस्पताल में सुविधाओं की कमी नजर आ रही है। कैंसर अस्पताल में सभी टैस्ट इत्यादि अंदर ही किए जा रहे हैं जबकि सरकारी अस्पताल में मरीजों को दवाईयां, टैस्ट, अल्ट्रासाऊंड इत्यादि बाहर से करवाने पड़ रहे है तथा सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने के लिए मरीजों को अपनी जेब ढीली करवानी पड़ रही है।

बाहर से लेकर आया 1500 रु. की दवाइंया | Cancer

इस संबंधी बातचीत करते हुए एक मरीज सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि वह दवाइयां तथा टैस्ट बाहर से करवाकर आया हूँ तथा उसका1500 रुपए के करीब का खर्च हो गया है। उसने बताया कि उसे कई दिनों से बुखार तथा खांसी की शिकायत थी। अंदर से सिर्फ कुछ ही दवाईयां मिली हैं जबकि मंहगी दवाईयां सिर्फ बाहर की दुकानों पर ही उपलब्ध हैं।

अच्छा चल रहा है अस्पताल, कोई दिक्कत नहीं

जब इस संबंधी ‘सच कहूँ’ ने सरकारी अस्पताल संगरूर के सीनियर मेडिकल अधिकारी किरपाल सिंह से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि कैंसर अस्पताल का सरकारी अस्पताल की बिल्डिंग में विस्तार होने संबंधी वह कुछ नहीं बता सकते, यह मामला उनके लेवल का नहीं है। उन्होंने दावा किया है कि सरकारी अस्पताल में मरीजों की दवाईयों पर टेस्ट अंदर ही करवाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि यदि गायनी वार्ड की बात की जाए तो यहां 42 बैड मौजूद हैं तथा हर महीने 500 से ज्यादा डिलीवरी हो रही हैं तथा किसी से कोई पैसा नहीं लिया जाता। रोजाना 100 के करीब अल्ट्रासाऊंड हो रहे हैं, 150 से 200 सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काऊंट) के टेस्ट होते हैं। इसके अलावा काला पीलिया की दवाई पिछले लंबे समय से मरीजों को दी जा रही है तथा सरकारी अस्पताल बढ़ियां तरीके से चल रहा है।

मरीजों को मिलें सस्ती दवाइयां | Cancer

समाज सेवी नौजवान रूपेन्द्र धीमान किक्की ने कहा कि यह जरूर है कि संगरूर में कैंसर अस्पताल के खुलने से मरीजों को काफी सुविधा मिली है लेकिन इससे सरकार को सरकारी अस्पताल का भी ध्यान रखना चाहिए। सरकारी अस्पताल में दवाई लेने आए मरीजों को उनका ईलाज सस्ते में करना संभव बनाना चाहिए।

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