लॉकडाऊन : बाजारों में पसरा सन्नाटा

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25 -30 प्रतिशत यातायात की रही आवाजाई

  • डीसी के आदेशों पर जरूरी वस्तुओं से संबंधित दुकानों रही खुली

जसवीर सिंह गहल/राजिन्द्र शर्मा बरनाला। राज्य सरकार की ओर से हर रविवार को लॉकडाऊन रखने की घोषणा के अंतर्गत रविवार को बरनाला जिले में तीनों विधान सभा हलकों अधीन आते बाजारों में दुकानों के स्टर चाहे मुकम्मल रूप में गिरे दिखे परंतु सड़क यातायात आम दिनों के मुकाबले 25 से 30 प्रतिशत निर्विघ्न जारी रहा। जबकि डीसी आदेशों के अंतर्गत जरूरी वस्तुओं के साथ संबंधित दुकानें पूरा दिन खुली रही।

कोविड-19 के प्रतिदिन बढ़ रहे मामलों को ध्यान में रखते सरकार की ओर से सख़्ती कर हर रविवार को लॉकडाऊन लगाने का ऐलान किया गया है, जिसके अंतर्गत पहले रविवार को आज जिले के तीनों ही विधान सभा हलकों के समूह बाजारों में डीसी बरनाला के आदेशों अनुसार एमरजैंसी सेवाओं के साथ सबंधित कैमिस्ट, दूध उत्पाद, फल-सब्जियों, हस्पताल, पेट्रोल पंप, कार मुरम्मत की दुकानें खुलीं रहने के साथ-साथ गेहूँ की फसल की संभाल संबंधी किसान, मजदूर अपने कामों में व्यस्त रहे और मंडियों में खरीद सम्बन्धित कामकाज भी निर्विघ्न जारी रहे।

जबकि बाकी दुकानें, शॉपिंग माल और कोचिंग सैंटर मुकम्मल रूप में बंद रहने कारण चारों तरफ सन्नाटा पसरा रहा। सड़कों पर आम दिनों के मुकाबले 25 से लेकर 30 प्रतिशत यातायात आम दिनों की तरह जारी रहने के कारण लोग बेखौफ अपने कामकाज और रिश्तेदारियों में आते-जाते दिखे। एक-दो सरकारी बसों को छोड़ कर ज्यादातर सरकारी और प्राईवेट बसें बंद रही और आम दिनों के उलट संख्या की सवारियों सफर के लिए स्थानीय मुख्य बस स्टैंड में बैठीं देखी गई।

किसानों का मोर्चा लगातार जारी

बेशक सरकार ने सख़्ती ईस्तेमाल करते बाजारों में दुकानें बंद रखकर रविवार को लॉकडाऊन लगाने का ऐलान किया हुआ है परंतु इसके उलट खेती कानूनों के विरोध में स्थानीय रेलवे स्टेशन, रिलायंस पेट्रोल पंप मापों पिंडी (धनौला), रिलायंस पेट्रोल पंप संघेड़ा और टोल प्लाजा महल कलां में चल रहे पक्के मोर्चे में किसानों की संख्या आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा रही। जहां किसान पुरूष और महिलाओं ने नारेबाजी करते केंद्र सरकार से खेती कानूनों को रद्द करने की मांग की।

प्रशासन के आदेशों की उड़ी धज्जियां

रविवार को लाकडाऊन रखने के आदेशों की जहां आम लोगों को पालना की गई, वहीं स्थानीय शहर में स्थित कुछ शराब के ठेके पर प्रशासन के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ती दिखाई दी। जबकि शराब के ठेके के साथ ही मैडीकल स्टोर बंद था। ठेके के करिन्दे आदेशों के अंतर्गत ठेके को बंद रखने की बजाय शराब बेचते रहे, जिससे लगता है कि डीसी आदेशों की बजाय करिन्दों के लिए शराब के ठेकेदारों के आदेश ज्यादा अहमीयत रखते हैं।

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