AHPI Leadership Summit: ''स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक के साथ मानवीय संवेदना और जवाबदेही जरूरी''

एएचपीआई राष्ट्रीय नेतृत्व सम्मेलन में गुणवत्ता, लागत, विश्वास और स्वास्थ्य क्षेत्र के भविष्य पर मंथन

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AHPI Leadership Summit: जयपुर (सच कहूँ न्यूज़)। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के अध्यक्ष एवं एएचपीआई राष्ट्रीय नेतृत्व सम्मेलन के मुख्य अतिथि डॉ. अभिजात शेठ ने कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ उसमें मानवीय संवेदना, जवाबदेही और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक और नवाचार के बढ़ते उपयोग के साथ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की मानवीय भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

यह जानकारी आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ विकास स्वर्णकार एवं सचिव डॉ सर्वेश अग्रवाल ने कहा कि एएचपीआई के दो दिवसीय राष्ट्रीय नेतृत्व सम्मेलन में देशभर से जुटे स्वास्थ्य नीति-निर्माताओं, अस्पताल संचालकों, चिकित्सकों, नर्सिंग लीडर्स, स्वास्थ्य प्रशासकों और उद्योग विशेषज्ञों ने गुणवत्ता, लागत और मरीजों के विश्वास के बीच संतुलन सहित स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक मंथन किया।

डॉ. शेठ ने स्वास्थ्य व्यवस्था के भविष्य के लिए चिकित्सा शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन मरीजों के प्रति संवेदना, चिकित्सकीय जिम्मेदारी और जवाबदेही का स्थान नहीं ले सकती।

सरकारी-निजी क्षेत्र के बीच संतुलन जरूरी : गायत्री राठौड़

राजस्थान की चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश के करीब 1.36 करोड़ परिवारों को आभा, डिजिटल हेल्थ, सामुदायिक स्वास्थ्य व्यवस्था, आयुष्मान और मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना जैसी विभिन्न पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी के बीच संतुलन बनाकर काम किया जा रहा है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत निजी क्षेत्र को करीब 4,000 करोड़ रुपये का सहयोग दिया गया है। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना एवं आरजीएचएस के भुगतान समय पर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राइजिंग राजस्थान के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में करीब 5,000 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है।

सम्मेलन में डॉ. विकास चंद्र स्वर्णकार, डॉ. गिरधर ज्ञानी और लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) एन.के. परमार सहित विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती के लिए पर्याप्त और प्रशिक्षित मानव संसाधन को आवश्यक बताया। नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता, प्रतिभाओं की भर्ती, प्रशिक्षण, कर्मचारियों के विकास के अवसर और उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी देने पर जोर दिया गया।

विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन की कमी वैश्विक चुनौती है। भारत में स्वास्थ्यकर्मियों के वितरण, प्रशिक्षण क्षमता और कर्मचारियों के प्रतिधारण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों ने टीम भावना को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों को फुटबॉल टीम की तरह सामूहिक जिम्मेदारी और समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता बताई। सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक तकनीक, जीनोमिक्स, डिजिटल स्वास्थ्य, दूरचिकित्सा, आभासी प्रशिक्षण और सिमुलेशन प्रयोगशालाओं सहित भविष्य की चिकित्सा तकनीकों पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम में डॉ. एस.एस. अग्रवाल, डॉ. दीपक माहेश्वरी, डॉ. अचल गुलाटी, डॉ. संजीव सिंह, डॉ. शुचिन बजाज, राज गोरे, डॉ. लालू जोसेफ, हिमांशु बैद, डॉ. संदीप बुधिराजा और डॉ. मारिया वर्गीज़ व हरजीलाल अटल सहित अनेक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अस्पताल संचालन, गुणवत्ता प्रबंधन, परिचालन दक्षता, मरीज सुरक्षा और स्वास्थ्य नेतृत्व से जुड़े विषयों पर विचार रखे।

AIHP

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