रेत में सफलता की इबारत लिखने वाली सीकर की इस बेटी को मिला राष्ट्रपति भवन के लिए विशेष आमंत्रण

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Santosh Devi Sikar: सीकर। राजस्थान के सीकर जिले के बेरी गांव की प्रगतिशील महिला किसान संतोष देवी के लिए यह वर्ष विशेष उपलब्धि लेकर आया है। उन्हें आगामी गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए विशेष आमंत्रण प्राप्त हुआ है। यह निमंत्रण जैसे ही डाक के माध्यम से गांव पहुंचा, पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई। Sikar News

गणतंत्र दिवस समारोह में देश के अलग-अलग हिस्सों से उन लोगों को आमंत्रित किया जाता है, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में नई मिसाल कायम की हो। संतोष देवी का चयन खेती के क्षेत्र में उनके नवाचारी प्रयासों और निरंतर संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है। गांववासियों का कहना है कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण अंचल की पहचान है।

संतोष देवी ने परंपरागत खेती से हटकर बागवानी और फलों की उन्नत खेती को अपनाया

बेरी गांव की रहने वाली संतोष देवी ने परंपरागत खेती से हटकर बागवानी और फलों की उन्नत खेती को अपनाया। खास तौर पर अनार की खेती में किए गए उनके प्रयोगों ने उन्हें जिले और प्रदेश स्तर पर अलग पहचान दिलाई। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही तकनीक, मेहनत और लगन से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उनके प्रयासों को महिला सशक्तीकरण का सशक्त उदाहरण भी माना जा रहा है। Sikar News

संतोष देवी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण मिलना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने बताया कि वर्षों की मेहनत और संघर्ष का यह सुखद परिणाम है। उनके अनुसार, यह सम्मान उन सभी लोगों का है, जिन्होंने उनके सफर में सहयोग किया और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया।

उन्होंने बताया कि उन्होंने अनार, सेब, अमरूद सहित कई फलों की खेती बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के की है। उनके खेतों में तैयार होने वाले फलों का आकार और गुणवत्ता लोगों को हैरान करती है। उन्होंने यह धारणा भी तोड़ी कि राजस्थान जैसे गर्म प्रदेश में सेब की खेती संभव नहीं है। Sikar News

महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित न रहें

संतोष देवी का मानना है कि महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित न रहें, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज और देश के विकास में योगदान दें। उनके प्रयासों से कई महिलाएं बागवानी के माध्यम से अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी सजग हैं और हर वर्ष बड़ी संख्या में पौधारोपण करवा रही हैं।

रसायनों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि और फसलों के लिए, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। उन्होंने अपने अनुभव से यह साबित किया है कि खेती को घाटे का सौदा मानने की सोच गलत है। मेहनत और सही दिशा में किए गए प्रयासों से खेती आजीविका का मजबूत साधन बन सकती है। Sikar News

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