अनामिका अनु को 2020 का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार
नई दिल्ली। बिहार की कवयित्री अनामिका अनु (Anamika Anu) को इस वर्ष का प्रतिष्ठित भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार दिए जाने का फैसला किया गया है। एक जनवरी 1982 को बिहार के मुजफ्फरपुर में जन्मी अनामिका अनु की गत वर्ष जुलाई में ‘कथादेश’ पत्रिका में छपी कविता ‘माँ अकेली रह गयी’ के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया जा रहा है। इस वर्ष पुरस्कार के निर्णायक प्रख्यात कवि एवम संस्कृति कर्मी अशोक वाजपेई थे। पुरस्कार में 21 हजार रुपये की राशि और प्रशस्ति पत्र शामिल है। श्रीमती अनु ने बिहार विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में एमए और पीएचडी की है और गत बारह वर्षों से केरल में रह रही हैं।
यह पुरस्कार 35 वर्ष की आयु तक के युवा कवि को दिया जाता रहा है पर अब इस साल से इस पुरस्कार के लिए अधिकतम आयु-सीमा चालीस वर्ष की गई है। अगले वर्ष से यह पुरस्कार किसी एक कविता के लिए न दिया जाकर किसी युवा कवि के पहले कविता संग्रह पर दिया जायेगा। पहले की ही तरह पाँच वर्षों के लिए जूरी नियुक्त की जा रही है जिसके सदस्य बारी-बारी से हर वर्ष पुरस्कार के लिए कवितासंग्रह चुनेंगे। अगले पांच वर्षों के लिए जूरी में होंगे अरुण देव, मदन सोनी, अष्टभुजा शुक्ल, आनन्द हर्षुल और उदयन वाजपेयी।
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