दुर्गम पहाड़ियों पर सैनिकों को अब रसद पहुंचायेगें फ़िरोजाबाद में बने ड्रोन

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कुछ माह पूर्व यहां पर बनाए गए थे अंतरिक्ष यात्रियों को सॉफ्ट लैंडिंग करवाने वाले पैराशूट

  • ऐरावत-2 नाम का यह ड्रोन खराब मौसम मे भी सैंनिकों तक वस्तुएं पहुंचाने मे है सक्षम

फिरोजाबाद (सच कहूँ/विकास पालीवाल)। Firozabad News: फिरोजाबाद जिले के वैज्ञानिक आए दिन कोई ना कोई नया कार्य करने में लगे है। अभी तक अंतरिक्ष यात्रियों को सॉफ्ट लैंडिंग करवाने के लिए 100 पैराशूट बनाए जा चुके है। अब हजरतपुर स्थित आयुध निर्माणी फैक्टरी के वैज्ञानिकों द्वारा एक और नया निर्माण कर अपनी क्षमता करवा दिया गया है। अंर्न्तराष्ट्रीय सीमाओं से सटी हमारी पर्वत श्रंखलाओं पर तैनात जवानों के लिए रसद और अन्य साजोसामान पारंपरिक तौर पर घोड़े या खच्चरों से पहुंचाई जाती है, लेकिन 18 हजार फीट से अधिक ऊँची पहाड़ियो पर अधिकांश समय वर्फवारी होती रहती है। Firozabad News

एसे दुर्गम इलाकों में ताजा भोजन सामिग्री, हथियार और आवश्यक दवाएं पहुंचना काफी मुश्किल हो जाता है। हैलीकॉप्टर सेवा भी अधिक कारगर नही रहती है। इन परिस्थितियों मे आपातकालीन सेवाओं को बहाल रखने के लिए फ़िरोजाबाद जिले के टूंडला तहसील क्षेत्र में हाईवे पर बने हजरतपुर स्थिति आयुध उपस्कर निर्माणी ने सफलता का झंडा गाड़ा है। रक्षा मंत्रालय के अधीन इस संस्थान ने स्वदेशी तकनीक से दुनिया का पहला हाई एल्टीट्यूड लॉजिस्टिक ड्रोन बनाया है। ऐरावत-2 नाम का यह ड्रोन खराब मौसम मे भी सफलता पूर्वक सैंनिकों तक आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने मे सक्षम है।

इस बारे में आयुध उपस्कर निर्माणी के जीएम अमित सिंह ने बताया है कि डिस्चार्ज होने पर सिर्फ एक घण्टे मे फुल चार्ज हो जाता है। प्रॉक्सिमिटी सेंसर से लैंस और जीपीएस गाइडेड ऐरावत ड्रॉन हर तरह के मौसम में उड़ सकता है। इस ड्रोन ने पे-लोड़ के साथ भारत – चीन सीमा में 5 हजार मीटर की ऊँचाई तक भी उड़ान भरी है। Firozabad News

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