Barabanki: ईरान में फंसे यूपी के बाराबंकी के लोग, परिजनों ने मांगी केंद्र सरकार से मदद

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बाराबंकी। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच जिले के कई परिवार गहरी चिंता में डूबे हैं। जानकारी के अनुसार, कुम (ईरान) में बाराबंकी के 12 से अधिक छात्र, मौलाना और उनके परिजन शिक्षा एवं धार्मिक अध्ययन के सिलसिले में रह रहे हैं। हालिया हमलों के बाद इंटरनेट सेवाएं बाधित हो जाने से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे परिवारों की व्याकुलता बढ़ गई है। Barabanki News

परिजनों का कहना है कि हमलों के तुरंत बाद शुरुआती कुछ घंटों में फोन के माध्यम से बातचीत संभव हो सकी थी। उस दौरान बताया गया कि शहर की सीमा के आसपास धमाकों की आवाजें सुनी गई थीं, हालांकि शहर के भीतर स्थिति सामान्य बताई गई थी। इसके बाद से इंटरनेट सेवा ठप होने के कारण कोई सीधा संपर्क नहीं हो पा रहा है।

बाराबंकी में कई परिवार अपने प्रियजनों की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं

कुम में रह रहे मौलाना जफर अब्बास, मौलाना आबिद हुसैन काजमी, मौलाना अली मेहदी रिजवी और मौलाना सैयद काशिफ रिजवी जैदपुरी सहित अन्य लोग वहां तालीम व धार्मिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उनके साथ परिवार के सदस्य भी मौजूद हैं। बाराबंकी में कई परिवार मस्जिदों में एकत्र होकर अपने प्रियजनों की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भले ही अनौपचारिक सूचनाओं के अनुसार सभी सुरक्षित बताए जा रहे हों, लेकिन प्रत्यक्ष संपर्क न होने से अनिश्चितता बनी हुई है।

परिवारों ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए समय रहते ठोस और संवेदनशील कदम उठाना आवश्यक है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और विदेश मंत्रालय से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर परिजनों को अवगत कराया जाएगा। Barabanki News

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