भागों वाली घड़ी, दिन प्यारा-प्यारा

भागों वाली घड़ी, दिन प्यारा-प्यारा

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Saint Dr. MSG: 15 अगस्त का दिन जहाँ भारत के इतिहास में बहुत महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन भारत गुलामी की जंजीरों से मुक्त हुआ और भारतवासियों ने आजादी की फ़िजा का आनंद लिया, वहीं यह पवित्र दिन रूहानियत में भी उच्च स्थान रखता है। इसी दिन (15 अगस्त 1967) दुनिया को रूहानियत की वह ज्योत मिली, जिसने संसार में अज्ञानता, अंधविश्वास, जात-पात, नफरत और सांप्रदायिकता के अंधकार को समाप्त करके इन्सानियत का ऐसा प्रकाश किया, जिससे पूरी मानवता का कल्याण हो रहा है।

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 15 अगस्त 1967 को श्री गुरुसर मोडिया, जिला श्रीगंगानगर (राजस्थान) की पवित्र धरती पर आदरणीय पिता नंबरदार मग्घर सिंह जी और आदरणीय माता नसीब कौर जी के घर अवतार धारण किया। आप जी अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। पूजनीय बापू जी गाँव के नंबरदार और बहुत बड़े जमींदार थे। घर में दुनियावी चीजों की कोई कमी नहीं थी। बहुत बड़ा खानदान, साधन-सम्पन्न परिवार और हर सुख-सुविधा के साधन मौजूद थे। लेकिन इतने बड़े घराने में अगर कोई कमी थी तो वह थी खानदान के वारिस की। घर में सब कुछ था, लेकिन 

संतान न होने की चिंता आदरणीय बापू  जी और माता जी को हमेशा सताती रहती थी। आदरणीय बापू जी का गाँव के संत त्रिवेणी दास जी के साथ बहुत स्नेह था।

बापू जी ने अपनी चिंता उनके सामने जाहिर की तो उन्होंने पूरा हौसला देते हुए कहा, ‘आप चिंता न करें। आपके घर कोई आम बच्चा जन्म नहीं लेगा। 

समय आने पर स्वयं परम पिता परमात्मा अपना स्वरूप आपके घर भेजेगा।’18 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद आप जी ने पूजनीय माता-पिता जी की इकलौती संतान के रूप में अवतार धारण किया। जब आप जी 4-5 वर्ष के थे तो संत त्रिवेणी दास जी ने आप जी से कस्सी का टक लगवाकर गाँव में बनने वाली पानी की डिग्गी का मुहूर्त करवाया और कहा कि इनके बारे में अभी आपको कुछ भी पता नहीं, समय आने पर पता चलेगा कि यह कितनी महान हस्ती हैं।

पूजनीय बापू जी आप जी से बहुत प्यार और सम्मान करते थे और आप जी की कही कोई बात नहीं टालते थे। प्यार इतना कि पूजनीय बापू जी आपको कंधों पर बैठाकर खेतों में ले जाते थे।

सतगुरु जी से मिलाप

पूज्य गुरु जी ने 5-6 वर्ष की उम्र में ही पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज से नाम की अनमोल दात प्राप्त की। आप जी आदरणीय बापू जी के साथ डेरा सच्चा सौदा शाह मस्ताना जी, शाह सतनाम जी धाम, सरसा आए। जब पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज तेरावास से नाम-शब्द वाले पंडाल में विराजमान हुए तो आप जी को आवाज देकर आगे बुलाया, ‘काका, आगे आ जा।’ अपने पास बिठाकर आपको भरपूर प्यार दिया। 

आप जी ने 7-8 वर्ष की उम्र में ही ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया था। उन दिनों किसी खास घर में ही ट्रैक्टर हुआ करता था। इसी उम्र में आप जी ने खेती संभालने का काम भी शुरू कर दिया। इससे पहले पूजनीय बापू जी घराने की जमीन ठेके पर देते थे। आप जी के कहने पर पूजनीय बापू जी ने आप जी को खेती करने की इजाजत दे दी। उस साल बारिश सही समय पर हुई और चने की भरपूर फसल हुई। 9 वर्ष की उम्र में आप जी ने खेतीबाड़ी के साथ-साथ खेती का हिसाब-किताब और आढ़तियों के साथ लेन-देन भी संभाल लिया।

पवित्र गुरुगद्दी की बख्शिश

रूहानियत में पवित्र गुरुगद्दी की बख्शिश एक अहम स्थान रखती है। सतगुरु ने सतगुरु को प्रकट करना होता है। पूजनीय परम पिता जी ने हजूर पिता जी को नाम-शब्द की अनमोल दात बख्शते समय अथाह प्यार देते हुए अपने पास बिठाया और बातचीत की। उसी दिन से उन्हें अपना वारिस बना लिया था।

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23 सितंबर 1990 को पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने आप जी (पूजनीय गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां) को अपने साथ स्टेज पर विराजमान करके आप जी को गुरुगद्दी की बख्शिश की और साध-संगत को वचन फरमाए, ‘‘ आज से यह हमारा ही रूप हैं। जो जीव इनसे प्रेम करेगा, इनका हुक्म मानेगा और इन पर विश्वास करेगा, वह मानो हमारा हुक्म मानेगा।’’ पूरी साध-संगत को पूजनीय परम पिता जी द्वारा गुरुगद्दी रस्म का पवित्र हुक्मनामा पढ़कर सुनाया गया। पूजनीय परम पिता जी ने आप जी को अपना रूप बख्शा और वचन फरमाए, ‘‘हम थे, हम हैं, हम ही रहेंगे।’’

पूजनीय परम पिता जी और पूज्य हजूर पिता जी लगभग सवा साल तक एक साथ स्टेज पर विराजमान होते रहे। अपने मुर्शिद-ए-कामिल पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पवित्र नाम और प्रभु परमात्मा को पाने का तरीका दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचे, संसार से जाति-प्रथा, अंधविश्वास, सांप्रदायिकता, नफरत और नशे रूपी कोढ़ का अंत हो, इसके लिए आप जी हर समय प्रयासरत रहते हैं। आप जी ने साढ़े सात करोड़ से अधिक लोगों की बुराईयाँ और नशे आदि छुड़वाकर परम पिता परमात्मा के नाम से जुड़ने का तरीका बताया। आप जी ने कन्या भ्रूण हत्या, वेश्यावृत्ति, समलैंगिकता, दहेज प्रथा आदि बुराईयों के विरुद्ध जनचेतना की ऐसी लहर चलाई, जिसका प्रभाव दुनिया के कोने-कोने में दिखाई दिया। 

आप जी का हर पल मानवता की भलाई के लिए समर्पित है। इस धरा पर मनुष्य का जीवन सुखी और खुशहाल हो, इसके लिए आपने 176 मानवता भलाई कार्य चलाए है। इनमें जरूरतमंदों के लिए फूड बैंक, क्लॉथ बैंक, बीमारों का इलाज, गरीब जरूरतमंदों को मकान बनाकर देना, रक्तदान, मरणोपरांत नेत्रदान और शरीरदान, पौधे लगाना, सफाई अभियान, नशा छुड़ाने के लिए (डेप्थ) मुहिम आदि शामिल हैं।

हर तरफ, सफलता-सर्वकला संपूर्ण

आप जी ने स्कूली शिक्षा अपने गाँव के स्कूल से प्राप्त की, जहाँ आप जी पढ़ाई में अग्रणी रहते थे। वहीं आप जी खेलों में भी अपनी टीम की कप्तान के तौर पर अगुवाई करते थे। आप जी ने 32 नेशनल गेम्स खेलीं। आप जी अपने खिलाड़ी साथियों की केवल खेलने और नेतृत्व करने में ही सहायता नहीं करते थे, बल्कि उनके खान-पान, आर्थिक जरूरतों और खेलों का सामान उपलब्ध करवाने में भी आर्थिक सहयोग करते थे। 

आप जी घरेलू जिम्मेदारियाँ निभाते हुए डेरा सच्चा सौदा में चल रही सेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। 
आप जी का परिवार साधन-सम्पन्न होने के कारण कई बार साथ वाले सेवादार या सतब्रह्मचारी सेवादार आप जी को हाथ से सेवा करने की बजाए सेवा की निगरानी करने के लिए कहते, लेकिन आप जी हमेशा हाथों से सेवा करने को प्राथमिकता देते थे। भारी सामान, गेहूँ की बोरियां आदि उठाते और अपनी जीप भी सामान ढोने के लिए दे देते। साथ वाले सेवादारों के चाय-पानी का प्रबंध भी अपने खर्च पर करते थे।

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