क्रिप्टो एक्सचेंज चलाने वाली कंपनियों पर बढ़ा निगरानी का खतरा

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नई दिल्ली (एजेंसी)। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिकारियों द्वारा मुंबई स्थित क्रिप्टो करेंसी एक्सचेज वजीर एक्स पर कर चोरी को लेकर की गई कार्रवाई के बाद अब देश में स्थित अन्य क्रिप्टो एक्सचेंजों पर भी निगरानी का खतरा बढ़ गया। मुंबई में की गई कार्रवाई में 40.5 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़े जाने और 49.20 करोड़ रुपये की वसूली से उत्साहित जीएसटी सतर्कता महानिदेशालय ने अब जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इससे जुड़े सूत्रों का कहना है कि क्वाइनस्विच कुबेर और यूनोक्वाई जैसे क्रिप्टो एक्सचेंज भी अब जीएसटी अधिकारियों की निगरानी में हैं। इनके भी कर चोरी करने की आशंका जताई जा रही है।

वित्त मंत्रालय ने यहां जारी एक बयान में कहा कि वजीर एक्स के कर चोरी करने की जानकारी मिलने पर की गयी कार्रवाई में 40.5 करोड़ रुपये के कर चोरी का पता चला है और संबंधित कंपनी से जीएसटी चोरी, ब्याज और जुर्माने के तौर पर 49.20 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।

इस क्रिप्टो एक्सचेंज के देश के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। इसका संचालन जनमाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड करती है और यह एक्सचेंज रूपया या डब्ल्यूआरएक्स में ट्रेडरों को लेनदेन की अनुमति देता है। लेनदेन पर ट्रेडरों को सेवा शुल्क देना होता है, जो जीएसटी के दायरे में हैं। संबंधित कंपनी इसकी का चोरी कर रही थी। डब्ल्यू आरएक्स की खरीद सिर्फ वजीरएक्स प्लेटफॉर्म से ही किया जा रहा है। डब्ल्यूआरएक्स का स्वामित्व सेसली की कंपनी बिनानस इंवेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के पास है।

जीएसटी अधिकारियों ने अब कर चोरी किए जाने की आशंका में ई कॉमर्स, आॅनलाइन गेमिंग, नॉन फंगिबल टोकन आदि का कारोबार करने वाली कंपनियों पर भी निगरानी बढ़ा दी है।
उल्लेखनीय है कि देश में क्रिप्टो करेंसी को वैध मुद्रा का दर्जा नहीं दिया गया है। रिजर्व बैंक और सरकार दोनों कर चुके हैं कि वे इसको मान्यता नहीं दे रहे हैं। हालांकि रिजर्व बैंक देश में भारतीय डिजिटल मुद्रा लाने पर विचार कर रहा है।

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