क्या कोरोना के पीछे चीन का हाथ या प्राकृतिक, अमेरिकी एक्सपर्ट ने दिया जवाब

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नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। देश व विदेश में कोरोना का कहर जारी है। पूरी दुनिया के लोगा ये जानने का प्रयास कर रहे हैं कि यह बीमारी प्राकृति है या कोई साजिश है। इस बीच अमेरिकी एक्सपर्ट डॉ. एंथेनी फाउची ने भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस एक प्राकृतिक बीमारी है, ये स्वीकार करना आसान नहीं है। एंथेनी फाउची ने एक इंटरव्यू में यह बात कही है। फाउची के अनुसार, अभी तक जिन्होंने कुछ जांच की है उनके मुताबिक ये किसी जानवर से आया है और फिर इंसानों में फैला है। लेकिन ये कुछ और भी हो सकता है। अमेरिकी एक्सपर्ट ने कहा कि अभी इस पर जांच की जरूरत है, ताकि हम वायरस के ओरिजन का पता लगा सकें।

दुनिया के कई देशों ने कोरोना के पीछे चीन का हाथ बताया

गौरतलब हैं कि कोरोना को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। शुरूआत में जहां इस वायरस की वजह एक चमगादड़ को बताया गया था, बाद में लैब में किया गया एक प्रयोग होने का दावा किया गया तो किसी ने इसे बायोलिजिकल हथियार के तौर पर माना था। WHO ने कोविड के ओरिजन पर जांच बैठाई गई थी लेकिन चीन ने उसमें ना के बराबर ही सहयोग किया था। हालांकि अमेरिका समेत दुनिया के कई ताकतवर देश काविड के पीछे चीन का हाथ मानते हैं।

विश्व में 16.75 करोड़ कोरोना के मामले

विश्व भर अब तक कोरोना के अब तक 16.75 करोड़ से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 34.78 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि 14.85 करोड़ लोगों ने कोरोना को मात दी है।

फाइजर, एस्ट्राजेनेका टीके कोरोना वैरिएंट पर ‘अत्यधिक प्रभावी’

पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की ओर से किए गए एक नए अध्ययन में कहा गया है कि फाइजर / बायोएनटेक और एस्ट्राजेनेका फार्मास्युटिकल कंपनियों की ओर से तैयार कोरोना वैक्सीन भारत में पाए जाने वाले कोविड-19 के नए वैरिएंट के खिलाफ अत्यधिक असरदार है। फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन दूसरी खुराक के बाद दो सप्ताह में कोरोना के नये स्वरूप (बी.1.617.2) के खिलाफ 88 फीसदी असरदार पाया गया है। जबकि एस्ट्राजेनेका टीके की दो खुराक की प्रभावशीलता कोरोना स्ट्रेन के खिलाफ 60 फीसदी रही थी। एजेंसी के अनुसार, दोनों टीकों की पहले टीका लगाने के बाद तीन सप्ताह में दोनों 33 प्रतिशत प्रभावी साबित हुई हैं।

 

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