टैरिफ बढ़ने पर भी 20 फीसदी तक सस्ते रह सकते हैं जियो के प्लान : मेरिल लिंच

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वोडा-आइडिया और भारती एयरटेल ने बढ़ाई दरें (Reliance jio)

नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में मोबाइल सेवा प्रदाता भारती एयरटेल, वोडा आइडिया और रिलायंस जियो ने प्रीपैड ग्राहकों के लिए तीन साल बाद टैरिफ में इजाफा किया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ में बढ़ोतरी के बावजूद रिलायंस जियो के प्लान अन्य की तुलना में 20 प्रतिशत तक सस्ते रह सकते हैं। वोडा-आइडिया और भारती एयरटेल की दरें मंगलवार से महंगी हो गई हैं जबकि जियो का टैरिफ छह दिसंबर से बढ़ जाएगा। वोडा आइडिया और भारती एयरटेल के टैरिफ में 41 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है। दोनों कंपनियों ने अपने लोकप्रिय प्लानों में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी की है। जियो के नए आॅल इन वन प्लान छह दिसंबर से लागू हो जाएंगे। कंपनी ने हालांकि अभी नए प्लानों का खुलासा नहीं किया है।

विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ दरें दूरसंचार कंपनियों की वित्तीय स्थिति के लिए वरदान साबित हो सकते हैं

वोडा आइडिया और भारती एयरटेल को चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारी घाटा हुआ था। ऐसी भी रिपोर्टें सामने आई थीं कि वोडा भारतीय बाजार से अपना कारोबार भी समेट सकता है। बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच का मानना है कि रिलायंस जियो के नये आल इन वन प्लांस दरें बढ़ाने के बावजूद दोनों अन्य कंपनियों की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक सस्ते रह सकते हैं।

  • मेरिल लंच का मानना है कि जियो ने 40 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है
  • किन्तु उम्मीद है कि वह अपने लोकप्रिय प्लानों में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ही करेगा
  • जिससे कि उसके प्लान अन्य कंपनियों के मुकाबले आकर्षक बने रहें।
  • रिलायंस जियो ने टैरिफ में बढ़ोतरी का एलान करते समय भी कहा था
  • कि वह अपने ग्राहकों को 300 प्रतिशत अधिक लाभ देगा।
  • मेरिल लिंच का मानना है कि यह लाभ डेटा के रुप में दिया जा सकता है।
  • गौरतलब है कि जियो ने पांच सितंबर 2016 को दूरसंचार क्षेत्र में कदम रखा था

तीन साल के दौरान सस्ते प्लानों और अच्छी सेवाएं उपलब्ध कराकर 35 करोड़ से अधिक ग्राहक बना चुका है जबकि अन्य कंपनियों के ग्राहकों की संख्या में खासी गिरावट आई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मची हलचल

उच्चतम न्यायालय के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) पर केंद्र के पक्ष को सही करार देना दूरसंचार कंपनियों के माली हालत के लिए बहुत बड़ा धक्का था। शीर्ष न्यायालय ने अपने आदेश में कंपनियों को आदेश दिया था कि वह सरकार को पुराना सांविधिक बकाया, जो लगभग 1.47 लाख करोड़ रुपए के करीब है अदा करें।

 

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