कर्नाटक के बाद राजस्थान में बढ़ा ओमिक्रॉन का खतरा, जानें, इससे कैसे बचा जा सकता है?

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नई दिल्ली (सच कहूँ डेस्क)। भारत में कोरोना कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की एंट्री हो गई है। वहीं ओमिक्रॉन को लेकर केन्द्र सरकार अलर्ट हो गई है। केन्द्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को दिशा-निर्देश दिए है। केन्द्र ने राज्यों को कहा कि भीड़-भाड़ इलाकों पर निगरानी रखें और लोगों को मॉस्क पहनने के लिए जागरूक करे। उधर राजस्थान के जयपुर में दक्षिण अफ्रीका से आए 4 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इन सभी को ओमिक्रॉन का संदिग्ध मानते हुए क्वारैंटाइन किया गया है। इनके सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेज दिए गए है।

आपको बता दें कि राजस्थान में फिर से कोरोना के नए मामले बढ़ने लगे है जिससे राजस्थान सरकार भी सतर्क हो गई है और उन्होंने एयरपोर्ट पर आने वाले लोगों पर निगरानी रखने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। अब तक ओमिक्रॉन के 29 देशों में इसके मामले आ चुके है। दरसअल वैज्ञानिकों के अनुसार, नए वैरिएंट पर वैक्सीन असरदार होगी या नहीं अभी दो हफ्ते और लगेंगे जांच जारी है।

Omicron variant

राजस्थान में तीसरी लहर की दस्तक?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका से लौटे परिवार ने जयपुर में अपने 12 रिश्तेदारों से मिला है और उनमें से 5 लोगों को कोरोना हुआ है। इनके सैंपल भी जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए हैं। हालांकि बच्चों को छोड़कर सभी ने वैक्सीन की दोनों डोज लगवा चुके है।

मुम्बई: 9 विदेशियों को हुआ कोरोना, सरकार हुई सतर्क

वहीं, अफ्रीका से आए मुम्बई 9 विदेशी नागरिकों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। ये सभी 10 नवंबर से 2 दिसंबर के बीच मुम्बई एयरपोर्ट पर पहुंचे थे।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक..

वैज्ञानिकों को पता चला है कि ‘ओमीक्रोन’ बीटा और डेल्टा स्वरूप सहित पिछले स्वरूपों से आनुवंशिक रूप से अलग है, लेकिन यह नहीं पता चल पाया कि क्या ये आनुवंशिक परिवर्तन इसे और अधिक संक्रामक या घातक बनाते हैं। अब तक, कोई संकेत नहीं मिले हैं कि स्वरूप अधिक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। यह पता करने में संभवत: हफ्तों लग सकते हैं कि क्या ओमीक्रोन अधिक संक्रामक है और क्या टीके इसके खिलाफ प्रभावी हैं या नहीं।

  • कोविड से बचने के लिए लगाई जा रही एमआरएनए वैक्सीन ओमिक्रोन वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी नहीं हो सकती है।
                                       -डॉ. समीरन पांडा, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के एपिडमियोलॉजी

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