Space News: एलियन ग्रह से मिला सिग्नल! वैज्ञानिकों के हाथ-पांव फूले, उसके बाद...

Space News: एलियन ग्रह से मिला सिग्नल! वैज्ञानिकों के हाथ-पांव फूले, उसके बाद...

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Space News: नई दिल्ली: अंतरिक्ष की दुनिया में वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है। सौर मंडल के बाहर मौजूद एक ग्रह से आने वाले रेडियो सिग्नल को पहली बार सीधे उसी ग्रह से जोड़कर पहचाना गया है। वैज्ञानिकों ने यह सिग्नल Beta Pictoris b नाम के विशाल एक्सोप्लैनेट से पकड़ा है। यह ग्रह पृथ्वी से करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।

यह खोज इसलिए खास है क्योंकि इससे पहले किसी ऐसे रेडियो सिग्नल को स्पष्ट रूप से किसी एक्सोप्लैनेट से जोड़ना संभव नहीं हुआ था। किसी ग्रह वाले सिस्टम से रेडियो उत्सर्जन मिलने पर यह तय करना मुश्किल होता था कि सिग्नल ग्रह से आ रहा है या उसके होस्ट स्टार से। इस बार शोधकर्ताओं ने रेडियो स्रोत को सीधे ग्रह की स्थिति से जोड़ने में सफलता हासिल की है।

कौन सा ग्रह भेज रहा है रेडियो सिग्नल? Space News

वैज्ञानिकों ने जिस ग्रह से सिग्नल पकड़ा है उसका नाम Beta Pictoris b है। यह एक विशाल गैस जायंट है और इसका द्रव्यमान बृहस्पति से करीब 10 गुना बताया गया है।

इस ग्रह का एक और खास पहलू इसकी तेज गति से घूमना है। शोध के मुताबिक यह अपनी धुरी पर करीब 8 से 9 घंटे में एक चक्कर पूरा करता है। ग्रह की तेज रोटेशन और बेहद मजबूत चुंबकीय क्षेत्र इसके रेडियो उत्सर्जन को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

MeerKAT टेलीस्कोप ने कैसे पकड़ा सिग्नल?

इस खोज के लिए दक्षिण अफ्रीका में मौजूद MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप ऐरे का इस्तेमाल किया गया। शोधकर्ताओं ने 2025 और 2026 के दौरान चार अलग-अलग मौकों पर Beta Pictoris सिस्टम का निरीक्षण किया।

इस दौरान 0.85 से 3.5 GHz की फ्रीक्वेंसी रेंज में तेज और बार-बार दोहराए जाने वाले रेडियो बर्स्ट के साथ लगातार मौजूद रहने वाला रेडियो उत्सर्जन भी दर्ज किया गया। सिग्नल में मजबूत सर्कुलर पोलराइजेशन भी पाया गया।

ग्रह के ऑरोरा से निकल रहा है सिग्नल

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह रेडियो उत्सर्जन ग्रह के ऑरोरा से जुड़ा हुआ है। पृथ्वी पर भी ध्रुवीय क्षेत्रों में ऑरोरा दिखाई देता है, जिसे आम तौर पर नॉर्दर्न लाइट्स और सदर्न लाइट्स के रूप में जाना जाता है।

इस प्रक्रिया में चार्ज्ड पार्टिकल्स ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र के साथ इंटरैक्ट करते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक Beta Pictoris b से मिले रेडियो सिग्नल को electron cyclotron maser instability (ECMI) नाम की प्रक्रिया से समझाया जा सकता है। इसी तरह की प्रक्रिया सौर मंडल के कुछ ग्रहों में ऑरोरल रेडियो उत्सर्जन से जुड़ी हुई है।

हजारों गुना ज्यादा मजबूत हो सकता है चुंबकीय क्षेत्र

इस खोज की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र का अनुमान लगाना है। शोधकर्ताओं के अनुसार रेडियो उत्सर्जन की फ्रीक्वेंसी से Beta Pictoris b के चुंबकीय क्षेत्र की ताकत का पता लगाया जा सकता है।

अध्ययन में ग्रह पर कम से कम करीब 1.25 किलो-गॉस के चुंबकीय क्षेत्र का संकेत मिलता है। यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की तुलना में हजारों गुना अधिक मजबूत है। यह किसी एक्सोप्लैनेट के चुंबकीय क्षेत्र की ताकत का पहला प्रत्यक्ष मापन बताया गया है।

क्या यह एलियंस का सिग्नल है?

नहीं। वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि इस खोज को एलियन सभ्यता या किसी दूसरे ग्रह से आए संदेश का सबूत नहीं माना जा सकता।

रेडियो सिग्नल प्राकृतिक प्रक्रिया से पैदा हुआ है और इसके ऑरोरल गतिविधि से जुड़े होने की व्याख्या की गई है। यानी वैज्ञानिकों ने किसी दूसरी सभ्यता का संदेश नहीं पकड़ा है।

फिर जीवन की तलाश के लिए क्यों अहम है यह खोज?

इस खोज का महत्व एलियंस का संदेश मिलने से नहीं, बल्कि एक्सोप्लैनेट को समझने के एक नए तरीके से है। किसी ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र उसके वातावरण और अपने होस्ट स्टार से होने वाली गतिविधियों के साथ उसके संबंधों को समझने में मदद कर सकता है।

हालांकि Beta Pictoris b खुद जीवन की तलाश के लिए पृथ्वी जैसा ग्रह नहीं है। यह एक विशाल गैस जायंट है। इसलिए इस सिग्नल को वहां जीवन की मौजूदगी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

फिर भी वैज्ञानिकों के लिए यह उपलब्धि महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में इसी तकनीक से दूसरे एक्सोप्लैनेट के चुंबकीय क्षेत्र और उनके वातावरण के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है।

एक जरूरी बात

यह शोध फिलहाल arXiv पर प्रीप्रिंट के रूप में उपलब्ध है और इसकी औपचारिक peer review प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसलिए इसके निष्कर्षों को आगे की स्वतंत्र जांच और वैज्ञानिक समीक्षा के संदर्भ में देखना जरूरी है।

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