Indian youth opportunities: युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत, इनके हाथों फिर विश्वगुरु बनेगा भारत

देखें,जनसांख्यिकी लाभांश से वैश्विक नेतृत्व तक का सफर

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भारत आज दुनिया के सबसे युवा देशों में अपनी पहचान बना चुका है। विश्व के अनेक विकसित देशों में जन्म दर लगातार घट रही है, औसत आयु बढ़ रही है और कार्यशील जनसंख्या का अनुपात कम हो रहा है। ऐसे समय में भारत के पास विशाल युवा शक्ति मौजूद है। यही युवा शक्ति आने वाले दशकों में भारत की अर्थव्यवस्था, तकनीक, उद्योग, विज्ञान और वैश्विक प्रभाव की दिशा तय करेगी। Indian youth opportunities

भारत की लगभग 68 प्रतिशत आबादी 15 से 64 वर्ष आयु वर्ग में है। 26 प्रतिशत आबादी 10 से 24 वर्ष के बीच है। 50 प्रतिशत से अधिक भारतीयों की आयु 25 वर्ष से कम है, जबकि 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। भारतीय नागरिकों की औसत आयु लगभग 28.4 वर्ष है। यह स्थिति भारत को एक बड़े जनसांख्यिकी लाभांश का अवसर देती है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार जनसांख्यिकी लाभांश उस आर्थिक क्षमता को कहा जाता है, जो आबादी की आयु संरचना में बदलाव से उत्पन्न होती है। जब कार्यशील आयु वर्ग की आबादी गैर-कार्यशील आयु वर्ग से अधिक हो जाती है, तब देश के सामने आर्थिक प्रगति का बड़ा अवसर पैदा होता है। भारत इस अवसर की खिड़की में प्रवेश कर चुका है और आगामी दशकों तक इसका लाभ उठा सकता है।

दुनिया की जरूरत अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत में कार्यशील आयु वर्ग के नागरिकों की संख्या 104 करोड़ तक पहुंच जाएगी। इसी अवधि में भारत का निर्भरता अनुपात अपने इतिहास के न्यूनतम स्तर 31.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। आगामी दशक में वैश्विक कार्यबल में होने वाली वृद्धि में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है। यूरोप, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य विकसित देशों के सामने वृद्ध होती आबादी तथा कुशल कामगारों की कमी बड़ी चुनौती बन रही है। स्वास्थ्य सेवा, इंजीनियरिंग, विज्ञान, अनुसंधान, तकनीक, निर्माण और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभाओं की मांग तेजी से बढ़ी है।

भारतीय मूल के लगभग चार करोड़ लोग आज दुनिया के विभिन्न देशों में रह रहे हैं। वे अपनी कर्मभूमि के देशों में योगदान देते हुए भारत की संस्कृति, कार्यशीलता और उद्यमशीलता का परिचय भी देते हैं। अमेरिका में भारतीय मूल के नागरिकों की औसत वार्षिक आय स्थानीय औसत आय की तुलना में काफी अधिक बताई जाती है। सिलिकॉन वैली से लेकर यूरोपीय देशों तक भारतीय प्रतिभा की उपस्थिति आज स्पष्ट दिखाई देती है। प्रवासी भारतीयों द्वारा भारत भेजी जाने वाली धनराशि भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। पिछले वर्ष भारतीय मूल के नागरिकों ने लगभग 14,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर भारत भेजे। यह दुनिया में किसी देश को प्राप्त होने वाली सबसे बड़ी रेमिटेंस राशि के रूप में सामने आती है। Indian youth opportunities

कौशल बनेगा वैश्विक रोजगार का पासपोर्टदेश से प्रतिवर्ष लाखों लोग रोजगार और व्यवसाय के अवसरों की तलाश में विदेशों का रुख कर रहे हैं। जापान, इजराइल, वियतनाम, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में भारतीय कुशल कामगारों की मांग बढ़ रही है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक इन देशों में करोड़ों कुशल कामगारों की कमी उत्पन्न हो सकती है। भारत सरकार ने इस वैश्विक अवसर को ध्यान में रखते हुए युवाओं के कौशल विकास के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, उड़ान, संकल्प, प्रशिक्षु अधिनियम के अंतर्गत प्रशिक्षण, महिलाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रधानमंत्री कौशल केंद्र, कौशल ऋण योजना और भारतीय कौशल संस्थान जैसी अनेक पहलें शुरू की हैं।

भारत हर वर्ष 25 लाख से अधिक कुशल कामगार तैयार कर रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में युवा ऐसे हैं जो शिक्षा, प्रशिक्षण या रोजगार से जुड़े हुए नहीं हैं। एक हालिया प्रतिवेदन के अनुसार लगभग आठ करोड़ युवा आज अध्ययन, कौशल विकास या रोजगार की मुख्यधारा से बाहर हैं। यह स्थिति भारत के सामने मौजूद अवसर को बड़ी चुनौती में भी बदल सकती है। युवा शक्ति की संख्या अपने आप आर्थिक शक्ति में परिवर्तित नहीं होती। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, डिजिटल दक्षता, स्वास्थ्य, अनुशासन, उद्यमशीलता और रोजगार के अवसरों का मजबूत तंत्र आवश्यक है।

विदेशों से समझौते और नए रास्तेभारत विभिन्न देशों के साथ प्रवास एवं गतिशीलता साझेदारी समझौतों के माध्यम से युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय रोजगार के रास्ते सुगम बना रहा है। जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ हुए समझौतों का उद्देश्य भारतीय कामगारों और पेशेवरों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित बनाना है। Indian youth opportunities

भारत विभिन्न देशों के साथ पारस्परिक मान्यता समझौतों पर भी काम कर रहा है। इससे भारतीय युवाओं की शिक्षा और कौशल को विदेशी संस्थानों में मान्यता मिलने का रास्ता आसान होगा। विदेश जाकर काम करने वाले भारतीयों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी समझौते महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया का व्यापक उद्देश्य यही है कि भारतीय युवा वैश्विक श्रम बाजार में सम्मानजनक अवसर प्राप्त करें और भारत अपनी विशाल मानव संसाधन शक्ति को आर्थिक सामर्थ्य में बदल सके।

विदेश जाएं, सीखें और भारत लौटकर रोजगार पैदा करेंभारत की युवा शक्ति का महत्व विदेशों में रोजगार प्राप्त करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। विदेशों में काम करने वाले भारतीय नई तकनीक, प्रबंधन पद्धति, उत्पादन तकनीक और वैश्विक बाजार की समझ हासिल कर भारत लौट सकते हैं। वे अपने अनुभव और पूंजी के आधार पर देश में नए व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं। यही प्रक्रिया भारत में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। इससे उत्पादन बढ़ेगा, निर्यात को गति मिलेगी और भारतीय उद्योग वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेंगे। भारत के लिए आज युवा वर्ग एक अमूल्य राष्ट्रीय संपत्ति है। इसकी शक्ति को सही दिशा देना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

युवा ऊर्जा को अराजकता नहीं, राष्ट्र निर्माण चाहिएहाल में दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेन-जी युवाओं से जुड़े आंदोलन ने युवा शक्ति की दिशा पर भी चर्चा को जन्म दिया। किसी भी लोकतांत्रिक समाज में युवाओं को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है। साथ ही सार्वजनिक विमर्श की भाषा, सामाजिक मर्यादा और भारतीय सांस्कृतिक संस्कारों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। भारत जिस समय वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, उस समय युवा ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। असंतोष को ज्ञान, संवाद, नवाचार, उद्यम और सामाजिक परिवर्तन की शक्ति में बदलना होगा। देश के युवाओं के सामने आज रोजगार की तलाश के साथ राष्ट्र निर्माण का भी बड़ा अवसर है। Indian youth opportunities

विश्वगुरु बनने की राह युवा शक्ति से होकर जाएगीभारत ने लंबे ऐतिहासिक संघर्ष के बाद आर्थिक और सामाजिक पुनर्निर्माण की यात्रा तय की है। कभी भारत विश्व व्यापार में महत्वपूर्ण स्थान रखता था। वस्त्र, मसाले, इस्पात और अनेक उत्पादों के कारण भारत को समृद्ध देश के रूप में देखा जाता था। औपनिवेशिक काल में भारत की आर्थिक शक्ति को भारी क्षति पहुंची। स्वतंत्रता के बाद भी लंबे समय तक आर्थिक विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।

1991 के आर्थिक सुधारों और उसके बाद विभिन्न चरणों में हुए आर्थिक बदलावों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी। वर्ष 2014 के बाद आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचे के विस्तार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण और उद्यमिता पर बढ़े जोर ने भारत के विकास को नई दिशा दी है। आज भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। इस यात्रा को स्थायी और व्यापक बनाने में युवा शक्ति निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

भारत की अगली बड़ी छलांग जनसंख्या की संख्या से नहीं, उस जनसंख्या की क्षमता से तय होगी। यदि युवा शिक्षा से जुड़े, कौशल हासिल करें, तकनीक को अपनाएं, उद्यमिता को आगे बढ़ाएं, भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जुड़े रहें और वैश्विक अवसरों का उपयोग राष्ट्रहित में करें, तो भारत की युवा शक्ति दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक और सामाजिक ताकतों में परिवर्तित हो सकती है। भारत के युवाओं के सामने इतिहास स्वयं को दोहराने का अवसर लेकर खड़ा है। यह पीढ़ी तय कर सकती है कि भारत विश्व की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा भागीदार बनेगा या वैश्विक नेतृत्व की भूमिका भी निभाएगा। विश्वगुरु भारत की कल्पना को साकार करने की शक्ति आज देश के युवा हाथों में है। Indian youth opportunities

प्रहलाद सबनानी, (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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