घी पौष्टिकता और शक्ति का अद्भुत स्त्रोत

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दूध प्रत्येक आयु वर्ग को पौष्टिकता प्रदान करता है। यह सारे संसार में प्रयुक्त होने वाला प्रिय पदार्थ है। इसके साथ-साथ दूध अपने हर रूप में उपयोगी है। इससे अन्य उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। जैसे- घी, पनीर, मावा, दही, छाछ, क्रीम, मक्खन इत्यादि। दूध की इसी व्यापक आवश्यकता के कारण इसका व्यवसाय विश्व में सर्वाधिक है।

घी क्या है?

घी दूध से प्राप्त होने वाला अद्भुत रसायन है जो प्राचीन भारत के बुद्धिमान और ऋषि-मुनियों की देन है। यूरोप और पश्चिमी देशों में अंगे्रज जाति के पूर्वज दूध से केवल मक्खन बनाने की कला ही जानते थे जबकि भारत में इससे भी अधिक सूक्ष्म और पौष्टिक पदार्थ घी का आविष्कार किया गया। घी वस्तुत: दूध में निहित वसा और विटामिनों का मिश्रण है।

दूध में कितना घी

प्राचीन आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार, गाय के एक द्रोण शुद्ध दूध में से एक प्रस्थ घी निकलना चाहिए अर्थात एक सेर दूध में से एक छटांक घी निकलता है जबकि भैंस के एक द्रोण शुद्ध दूध में पांच भाग घी अधिक निकलता है अर्थात एक सेर दूध में एक छटांक और पांचवां भाग (लगभग 70 ग्राम) घी निकलेगा। भेड़ तथा बकरी के एक सेर दूध में डेढ़ छटांक (लगभग 90 ग्राम) घी निकलेगा। किसी भी दूध को मथकर उसमें निकलने वाले घी की मात्रा से दूध की शुद्धता की जांच आसानी से की जा सकती है।

घी के गुण

घी दूध का पौष्टिक और ठोस रूप है। इसमें दूध की तुलना में सूक्ष्म और भारी-दोनों गुण होते हैं। गाय के दूध की भांति गाय का घी भी आयुर्वेद में अमृत का रूप माना गया है, क्योंकि यह दूध का ही सत्व होता है। घी के गुणों को अनिर्वचनीय माना गया है। घी वातावरण में शुद्धि उत्पन्न करता है। यह पर्यावरण का महान रक्षक है। आयुर्वेद के अनुसार गाय का घी किसी भी प्रकार के विष का प्रभाव नष्ट करने में सक्षम है। यह अनेक औषधियों का आधार है, जिसमें विलीन होकर ही वे अपना प्रभाव दिखाती हैं। वास्तव में घी पुष्टि और शक्ति का अद्भुत स्त्रोत है।

-डॉ. राजीव शर्मा

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