Axiom Mission 4: अहम साबित होगा शुभांशु शुक्ला का अंतरिक्ष अनुभव : वैज्ञानिक मिला मित्रा

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नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए। इस अवसर पर नासा की पूर्व वैज्ञानिक डॉ. मिला मित्रा ने इस अंतरिक्ष अभियान की वैज्ञानिक महत्ता और उससे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। Axiom Mission 4

डॉ. मित्रा ने बताया कि एक्सिओम-4 मिशन भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पहली बार हुआ है जब किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने आईएसएस पर पहुँचकर वैज्ञानिक प्रयोगों में सक्रिय भागीदारी की। इस मिशन के अंतर्गत कुल 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए गए, जिनमें से 7 प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए थे। इन प्रयोगों में मूंग व मेथी जैसी फसलों का अंतरिक्ष में अंकुरण, मानव शरीर पर शून्य गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव, तथा मानव-कंप्यूटर संवाद जैसे विषयों का गहन अध्ययन किया गया।

उन्होंने कहा, “यह मिशन न केवल विज्ञान की दृष्टि से, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। जब विभिन्न देश मिलकर शोध करते हैं, तो न केवल खोजों में प्रगति होती है, बल्कि वैश्विक एकता का संदेश भी प्रसारित होता है।”

शून्य गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे शिथिल होने लगती हैं

डॉ. मित्रा ने अंतरिक्ष में दीर्घकालीन प्रवास के प्रभावों की चर्चा करते हुए बताया कि शून्य गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे शिथिल होने लगती हैं, हृदय गति में परिवर्तन आता है, रक्त प्रवाह असंतुलित हो जाता है और दृष्टि तथा प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी असर पड़ता है। इन प्रभावों से उबरने के लिए शुभांशु शुक्ला और उनके साथियों को पृथ्वी पर लौटने के बाद दो सप्ताह से लेकर एक माह तक पुनर्वास चिकित्सा से गुजरना होगा। इस प्रक्रिया में उनकी मांसपेशियों, दृष्टि और रोग प्रतिरोधक क्षमता को पुनः पृथ्वी के वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए विशेष चिकित्सकीय उपाय किए जाएंगे।

डॉ. मित्रा ने यह भी कहा, “शुभांशु शुक्ला का यह अनुभव भारत के आगामी गगनयान मिशन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। वे अब अंतरिक्ष में रहने, काम करने और पृथ्वी पर लौटने की समस्त प्रक्रियाओं से परिचित हो चुके हैं। उनके अनुभव से भावी अंतरिक्ष यात्रियों को अमूल्य मार्गदर्शन मिलेगा।” उन्होंने इस पूरे मिशन को भारत के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा, “शुभांशु न केवल पहले भारतीय हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखा, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के अंतरिक्ष विज्ञानियों के लिए प्रेरणास्रोत भी बनेंगे।” Axiom Mission 4

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